ममता सरकार का बड़ा अभियान: 2 महीने में हर बूथ को मिलेंगे 10 लाख रुपये

कलकत्ता

 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने बड़ा दाव खेला है. सरकार ने एक अभूतपूर्व 8000 करोड़ रुपये की लागत वाले जनसंपर्क कार्यक्रम ‘आमादेर पारा, आमादेर समाधान’ (हमारा मोहल्ला, हमारा समाधान) शुरू किया. इस पहल का उद्देश्य पूरे राज्य में स्थानीय समस्याओं जैसे स्ट्रीट लैंप लगाने, सड़कों की स्थिति सुधारने और जलापूर्ति सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों का समाधान करना है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 22 जुलाई को इस योजना की घोषणा करते हुए इसे देश में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम बताया था.

इस कार्यक्रम की निगरानी के लिए मुख्य सचिव मनोज पंत के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स गठित की गई है और जिला स्तर पर भी टास्क फोर्स का गठन किया गया है. कई जिलों में शनिवार से ही कैंप शुरू हो गए हैं. ममता बनर्जी ने कहा कि हम प्रत्येक बूथ के लिए 10 लाख रुपये आवंटित कर रहे हैं. कुल मिलाकर राज्य सरकार इस कार्यक्रम पर 8000 करोड़ रुपये खर्च करेगी. यह अभियान दो अगस्त से शुरू हो रहा है.

दो महीने तक चलेगा कार्यक्रम

सरकार के एक बयान के अनुसार यह कार्यक्रम दो महीने तक चलेगा, जिसके बाद 30 दिनों तक प्रशासनिक मूल्यांकन होगा. लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान तीन महीने की अवधि में किया जाएगा. कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में प्रत्येक दो बूथों के लिए एक कैंप आयोजित किया जा रहा है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि हमने देखा है कि स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी समस्याएं जैसे पानी का नल लगाना, बिजली का खंभा स्थापित करना या क्षेत्र में उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण हैं.

हालांकि, स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर काम करते हैं, यह समावेशी पहल एक छत के नीचे सभी समस्याओं को हल करने का अवसर प्रदान करती है. आमादेर पारा, आमादेर समाधान आत्मनिर्भर बंगाल के दृष्टिकोण पर आधारित है. सरकारी अधिकारी प्रत्येक मोहल्ले में मौजूद रहकर शिकायतें सुनेंगे, मांगों को दर्ज करेंगे और प्रक्रिया की देखरेख करेंगे. यह प्रक्रिया लगभग दो महीने तक चलेगी. सरकार ने एक विज्ञापन में कहा कि आप apas.wb.gov.in पर शेड्यूल, स्थिति और प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं. आप तय करें कि आपके बूथ का बजट कैसे खर्च होगा.

इस पहल को भारत के इतिहास में अभूतपूर्व बताया जा रहा है जो नीति निर्माण में जनता को केंद्र में रखने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इसे ‘दुआरे सरकार 2.0’ करार देते हुए कहा कि यह 2021 के चुनावों से पहले शुरू किए गए ‘दुआरे सरकार’ कार्यक्रम की तरह ही प्रभावी हो सकता है. 80,000 बूथों को कवर करने वाला यह अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में छोटे-छोटे मुद्दों जैसे टूटी सड़कों, पानी की कमी और खराब स्ट्रीट लाइट्स को हल करने पर केंद्रित है.

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