भारतीय उत्सवों में रचा-बसा है हमारी परंपरा और पहचान: श्रीमती गौर का बयान

भारतीय त्यौहारों की बात ही निराली है, हमारे उत्सव हमारी संस्कृति के जीवंत उत्सव हैं: राज्य मंत्री श्रीमती गौर

भारतीय उत्सवों में रचा-बसा है हमारी परंपरा और पहचान: श्रीमती गौर का बयान

राज्य मंत्री गौर बोलीं – भारतीय त्यौहार संस्कृति और संस्कारों के जीवंत प्रतीक

भोपाल

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंखयक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा है कि भारतीय त्यौहारों की बात ही निराली है, हमारे उत्सव हमारी संस्कृति के जीवंत उत्सव होते हैं। सावन वह ऋतु है, जिसमें प्रकृति स्वयं नृत्य करती है। यह महीना केवल बारिश का नहीं है, यह शिव की भक्ति, नारी की शक्ति और प्रकृति की भव्यता का संगम है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर रविवार को अयोध्या नगर में सावन उत्सव समारोह में हजारों की संख्या में उपस्थित नारी शक्ति को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि सावन तो जैसे नारी का ही महीना है, जिसमें वह घर को सजाती है, समाज को जोड़ती है और परंपरा को अगली पीढ़ी तक सौंपती है। नारी सिर्फ घर की नहीं, हमारी संस्कृति की संरक्षक भी हैं। उन्होंने कहा कि "नारी जब परंपरा निभाती है, तो पीढ़ियाँ संस्कार सीखती हैं। सच पूछिए तो… स्त्री की यही आस्था, हमारी सनातन संस्कृति की असली शक्ति है।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मुझे आज बहुत प्रसन्नता है कि बड़ी संख्या में आप सावन महोत्सव मनाने के लिए आए। यह जरूर कहना चाहूंगी उत्सव के साथ कुछ संकल्प लेने की हमको आवश्यकता है। सामाजिक एकता परिवार की खुशहाली और स्वस्थ जीवन से जुड़ने का काम भी करें। मैं सभी बहनों से कहना चाहूंगी कि सावन के महीने में सभी को एक पेड़ जरूर लगाना है। दूसरा यह कि विवाह और हमारे त्यौहार में गाए जाने वाले गीत अपने घर की बेटी और बेटी स्वरूप बहू को जरूर सिखाएंगे।

सावन उत्सव में तीन हजार से अधिक महिलाएं उपस्थित थी। उत्सव स्थल पर स्टाल लगाए, डांस, संगीत, रैंप वाक, झूलों का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बहनों को पुरस्कृत किया गया।

 

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