गाजा पर नेतन्याहू के प्रस्ताव को ठुकराया, इस ताकतवर मुस्लिम देश के साथ UK, रूस और ऑस्ट्रेलिया भी खड़े

अंकारा
मिडिल-ईस्ट के हालात एक बार फिर तेजी से बिगड़ने लगे हैं। एक तरफ इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गाजा शहर पर सैन्य नियंत्रण लेने की योजना को मंजूरी दे दी है, तो दूसरी तरफ ताकतवर मुस्लिम देश तुर्की ने नेतन्याहू की योजना में टांग अड़ा दिया है। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि तुर्की गाजा सिटी पर नियंत्रण करने की इजरायल की योजना की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इता ही नहीं तुर्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से इस योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का आह्वान किया है।

तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल को अपनी युद्ध योजनाओं को तुरंत रोकना चाहिए और गाज़ा में युद्धविराम पर सहमत होना चाहिए। तुर्की ने ये भी कहा कि इजरायल को द्वि-राज्य समाधान के लिए बातचीत शुरू करनी चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि इजरायल द्वारा गाजा पट्टी में नरसंहार और फ़िलिस्तीनी भूमि पर कब्ज़े के कदम ने वैश्विक सुरक्षा को भारी झटका दिया है।

ब्रिटिश पीएम ने नेतन्याहू से पुनर्विचार का आग्रह किया
इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी तुर्की की हां में हां मिलाया है और इजरायल से गाजा पर पूर्ण नियंत्रण करने के अपने फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिटेन 'दो-राज्य समाधान' के तहत शांति स्थापना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया ने भी इजरायल से अपनी इस योजना से पीछे हटने का आग्रह किया है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि "स्थायी रूप से जबरन विस्थापन अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।"

इजरायल के अंदर भी हो रहा विरोध
उधर, संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत दिमित्री पोलियांस्की ने नेतन्याहू की इस योजना को बिल्कुल गलत दिशा में उठाया गया और एक बहुत बुरा कदम बताया है। मॉस्को ने भी गाज़ा में इजरायल की कार्रवाइयों की बार-बार आलोचना की है और युद्ध शुरू होने के बाद से ही युद्धविराम का आह्वान किया है। इजरायल के अंदर भी नेतन्याहू के इस प्लान का विरोध हो रहा है। इजरायली विपक्षी नेता यायर लापिड ने कहा कि यह योजना सैन्य और रक्षा प्रतिष्ठान की स्थिति के बिल्कुल विपरीत है, और इसमें लड़ाकू सैनिकों की थकान और थकावट को ध्यान में नहीं रखा गया है।

नेतन्याहू का इरादा जातीय सफाया?
उधर, फ़िलिस्तीनी राजनेता मुस्तफ़ा बरघौती ने कहा है कि इजरायल का यह फ़ैसला युद्ध अपराध की घोषणा है। उन्होंने कहा कि यह कदम दर्शाता है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार का असली इरादा गाज़ा पट्टी में सभी फ़िलिस्तीनी लोगों का जातीय सफ़ाया है।

गाजा और मिडिल-ईस्ट में युद्ध और भड़कने की आशंका
गाजा शहर पर नियंत्रण करने का विवादास्पद निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पूरे इजरायल में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें युद्ध को तत्काल समाप्त करने और हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की तत्काल वापसी सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा, ‘‘सुरक्षा कैबिनेट के मंत्रियों का बहुमत से यह मानना है कि सुरक्षा कैबिनेट को सौंपी गई वैकल्पिक योजना से न तो हमास की हार होगी और न ही बंधकों की वापसी होगी।’’ यह मंजूरी उस पांच सूत्री लक्ष्य के तहत दी गई जिसका मुख्य उद्देश्य हमास को ‘‘निरस्त्र’’ करना है। इस निर्णय ने इस क्षेत्र में लगभग दो साल से जारी युद्ध के और तीव्र होने की आशंका पैदा कर दी है।

 

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