ग्लोबल क्रैश अलर्ट! साल 2038 में समय पीछे लौटने का डर, जानिए वजह

नई दिल्ली

फर्ज कीजिए कि आप एक सुबह उठे और कंप्‍यूटर-लैपटॉप आदि खोला, जिसमें तारीख 137 साल पुरानी है। सबसे पहला खयाल तो यही आएगा कि सिस्टम में खराबी है या डेट-टाइम बदल गया है। इसके बाद आप अपने आसपास के सिस्टम भी देखते हैं तो पता लगता है कि सब में पुरानी तारीख ही दिख रही है। मुमकिन है कि आपको लगे कि आप टाइम ट्रेवल कर इतिहास में पहुंच गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह एक तरह का तकनीकी खतरा है, जो साल 2038 में आ सकता है। इस दौरान जो सिस्टम 32-bit signed integers इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें तारीख साल 1901 की दिखने लगेगी। सुनने ये जरा पेचीदा है, आइए इसको आसान भाषा में समझते हैं।

जब अपने आप रीसेट हो जाएगा टाइम
रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंप्यूटर सिस्टम टाइम को यूनिक्स टाइम फॉर्मेट में ट्रैक करते हैं। यूनिक्स टाइम 1 जनवरी, 1970 की आधी रात से अब तक के सेकंड गिनता है। ज्यादातर पुराने सिस्टम इस गिनती को 32-bit signed integers में स्टोर करते हैं, जिसकी एक लिमिट होती है। 19 जनवरी, 2038 को सुबह 3:14:07 बजे यह लिमिट खत्म हो जाएगी। इसके बाद समय गलत होकर 13 दिसंबर, 1901 पर रीसेट हो जाएगा।

सिर्फ गड़बड़ नहीं होगी, यह खतरनाक भी है
यह एक लिहाज से सिर्फ तकनीकी गड़बड़ लग रही हो, लेकिन यह बड़ा खतरा है। इसका असर उन सिस्टम्स पर पड़ सकता है जो हमारे रोजमर्रा के जीवन में काम आते हैं। इससे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में गड़बड़ी हो सकती है, क्योंकि वे समय को गलत समझेंगे। अस्पतालों के डिवाइसेस, बैंकों के सर्वर, हवाई जहाज और बिजली ग्रिड जैसे सिस्टम 32-बिट तकनीक पर चलते हैं। इनमें टाइम गलत होते ही आर्थिक नुकसान और लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इससे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में गड़बड़ी हो सकती है, क्योंकि वे समय को गलत समझेंगे। यह गड़बड़ी सिस्टम क्रैश, डेटा खराब होने या गलत फैसलों का कारण बन सकती है।

अब तक क्यों ठीक नहीं हुई यह दिक्कत?
साल 2006 में ही इस समस्या का पता लग गया था, बावजूद इसके कई सिस्टम अब भी पुरानी तकनीक पर रन कर रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि पुराने सिस्टम को बदलने या अपग्रेड करने में बहुत पैसा लगता है। कई विकासशील और गरीब देश इतना खर्च नहीं उठा सकते हैं। इसके अलावा, अपग्रेड के दौरान सिस्टम बंद करना खतरनाक हो सकता है, खासकर उन सिस्टम्स का बंद होना बेहद घातक होगा जो लोगों की जान बचाते हैं।

इस खतरे से बचने का यही उपाय है
इस समस्या से बचने के लिए सबसे आसान उपाय यही है कि सिस्टम को 32-बिट से 64-बिट तकनीक में बदला जाए। 64-बिट सिस्टम समय को बहुत लंबे समय तक स्टोर कर सकते हैं, जिससे यह समस्या खत्म हो जाएगी। हालांकि, इसमें भी कुछ चुनौतियां हैं। कई पुराने उपकरण ऐसे हैं जिन्हें आसानी से अपग्रेड नहीं किया जा सकता, इनके लिए एक अलग रास्ता तैयार करना होगा। इसके अलावा, दुनिया भर के उद्योगों और सरकारों को एकसाथ आना होगा, ताकि दुनिया भर में बदलाव आसानी से हो सके और कोई भी व्यवस्था भविष्य में ठप न पड़े काम करना होगा ताकि यह बदलाव आसानी और तेजी से हो सके।

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