मप्र में दो इस्कॉन मंदिरों का निर्माण, कोलार में 111 फीट ऊँचाई वाला मंदिर तैयार होगा

भोपाल 
शहर में दो भव्य इस्कॉन मंदिरों का निर्माण हो रहा है। पहला मंदिर पटेल नगर, रायसेन रोड पर 80 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा। इसकी ऊंचाई 108 फीट होगी। इसका डिज़ाइन चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया है, जिन्होंने अयोध्या में रामलला मंदिर का डिज़ाइन भी बनाया। दूसरा मंदिर कोलार रोड पर बनेगा, जिसकी लागत 200 करोड़ रुपए होगी और यह प्रदेश का सबसे बड़ा इस्कॉन मंदिर होगा। इसकी ऊंचाई 111 फीट होगी। दोनों मंदिरों के लिए भूमि पूजन हो चुका है और कुछ निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है।

दो सत्संग हॉल में 2000 से अधिक भक्त बैठ सकेंगे
रायसेन रोड पटेल नगर इस्कॉन के प्रवक्ता स्वामी आदिगुरु आदर्श मेहर ने बताया कि वर्ष 2012 में इस्कॉन के 5 भक्तों का एक समूह भागवत गीता आदि ग्रंथों का वितरण करने भोपाल आया था। धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए। उद्योगपति व कृष्ण भक्त राकेश शर्मा के पिता श्रीकृष्ण शर्मा ने चार एकड़ भूमि मंदिर निर्माण के लिए दान में दी। अब मंदिर का निर्माण राजस्थान के पत्थरों से होगा। इसमें दक्षिण व उत्तर भारतीय शिल्प व स्थापत्य कला का संगम होगा । मंदिर 1,51,000 वर्गफीट भूमि पर बनेगा। इसमें भगवान श्रीराधावल्लभ व प्रभुपाद की प्रतिमाएं होंगी। दो सत्संग हॉल होंगे, जिनमें 2000 से अधिक भक्त बैठ सकेंगे। 6000 वर्गफीट में आधुनिक रसोईघर बनेगा। 150 ब्रह्मचारियों के लिए आश्रम भी होगा। वैदिक प्रदर्शनी के लिए ऑडिटोरियम और अतिथि कक्ष रहेगा। शाकाहारी गोविंदा रेस्टोरेंट भी बनेगा। मंदिर का निर्माण दानदाताओं के सहयोग से 5 साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

कोलार में मंदिर के साथ पार्क, फाउंटेन और म्यूज़ियम भी होगा
इस्कॉन मंदिर कोलार के अध्यक्ष स्वामी रसानंद दास ने बताया कि यहां मंदिर के साथ सत्संग हाल व गोशाला आदि का निर्माण करीब 9 एकड़ भूमि में होगा। इसकी अनुमानित लागत 200 करोड़ रुपए है। मंदिर के साथ सत्संग हॉल, गोशाला, कम्युनिटी हॉल, संत आश्रम, अतिथि गृह, गुरुकुल और भोजनशाला का निर्माण होगा। मंदिर की थीम प्राचीन राजस्थानी मंदिरों पर आधारित होगी। मुख्य मंदिर 20,000 स्क्वायर फीट में होगा, जिसमें राधा-गोविंद देव, गौर-निताई और जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के विग्रह विराजेंगे। मंदिर के 20 फीट ऊंचे द्वारों पर भगवान कृष्ण की लीलाओं की मूर्तियां उकेरी जाएंगी। मंदिर परिसर में एक गोशाला, गोविंदा रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस, कम्युनिटी हॉल, भोजनालय, किड्स पार्क, गार्डन, फाउंटेन और आध्यात्मिक म्यूज़ियम भी होगा। इन मंदिरों के निर्माण से भोपाल को एक नई पहचान मिलेगी और यह धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनेगा।

 

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