अर्चना तिवारी की गुमशुदगी रहस्य में नया खुलासा, 13 दिन बाद सुराग हाथ लगा

इंदौर

इंदौर से ट्रेन में सवार होकर रक्षा बंधन मनाने कटनी के लिए निकली 29 साल की अर्चना तिवारी का 13 दिनों के बाद भी कुछ पता नहीं चला है। हालांकि, अब पुलिस के हाथ एक सुराग लगा है जिसके बाद अर्चना की मिस्ट्री सुलझने की उम्मीद जागी है। जीआरपी ने ग्वालियर के एक कांस्टेबल राम तोमर को हिरासत में लिया है। पता चला है कि राम तोमर ने ही अर्चना तिवारी के लिए टिकट कराया था। तोमर से पूछताछ करके यह पता लगाया जा रहा है कि उसका अर्चना के साथ क्या संबंध है, उसने क्यों इंदौर से ग्वालियर तक का टिकट कराया था और क्या अर्चना का राज वह जानता है?

इससे पहलेअर्चना के परिजनों ने मानव तस्करी की आशंका जताते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की थी। इंदौर हाई कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस के साथ ही सिविल जज की तैयारी कर रही अर्चना 7 अगस्त को नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से कटनी के लिए निकली थीं। अर्चना की आखिरी लोकेशन भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन पर मिली थी, जिसके बाद उसके परिजनों ने रानी कमलापति जीआरपी थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था।

पुलिस रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से लेकर इटारसी और कटनी तक के क्षेत्रों में भी गहनता से जांच कर चुकी है और स्टेशन व आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी खंगाल चुकी है लेकिन अब तक अर्चना का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि आस-पास के सभी रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और ट्रैवल एजेंसियों को इसकी सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है, चाहे वह दुर्घटना हो, अपहरण या अन्य कोई वजह। लोढ़ा ने बताया कि अर्चना की आखिरी लोकेशन इटारसी रेलवे स्टेशन मिली है और वहीं उसका मोबाइल बंद हुआ है।

उन्होंने कहा, "इटारसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में उसे कुछ लोगों ने देखा भी है। उसके बाद वह कहां गई, क्या हुआ… हम पता लगाने में जुटे हुए हैं। हमें उम्मीद है कि हम जल्द पता लगा लेंगे।" पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के दौरान जहां जरूरत पड़ रही है, वहां संबंधित अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। इस बीच, अर्चना के परिजनों ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए इसे मानव तस्करी का मामला बताया है और इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। अर्चना के ताऊ बाबू प्रकाश तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, 'यह मानव तस्करी का मामला है लेकिन पुलिस इस नजरिए से जांच नहीं कर रही है।'

13 दिन की जांच के बाद पुलिस को सुराग मिला कि अर्चना का टिकट भंवरपुरा थाने में तैनात कांस्टेबल राम तोमर ने कटाया था। उसने इंदौर से ग्वालियर तक के लिए टिकट बुक की थी। दोनों के बीच में क्या रिश्ता है, यह अभी साफ नहीं हुआ है। परिवार के लोगों ने तोमर को पहचानने से इनकार किया है। जीआरपी तोमर से पूछताछ करके पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों के बीच में किस तरह का संबंध है और क्या वह जानता है कि अर्चना कहां है। वहीं सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान तोमर ने कहा है कि उसने टिकट जरूर कराया था लेकिन अर्चना ने किसी और टिकट पर यात्रा की थी।

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