श्रद्धालुओं की उम्मीदों पर पानी, इस साल नहीं होगी किन्नर कैलाश यात्रा

हिमाचल 
खराब मौसम के चलते इस साल की किन्नर कैलाश यात्रा रद्द कर दी गई है। यह फैसला लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और रास्तों की खराब स्थिति को देखते हुए लिया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है।

इस यात्रा में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यात्रा काफी कठिन मानी जाती है क्योंकि इसमें ऊंचे पहाड़ों और खतरनाक रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन इस साल मौसम की अप्रत्याशित स्थिति ने यात्रा को असंभव बना दिया है।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि रास्तों पर कई जगह भूस्खलन हुआ है, जिससे आगे बढ़ना जोखिम भरा हो गया है। इसके अलावा, अचानक बाढ़ और चट्टानें गिरने का भी खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यात्रा करने का प्रयास न करें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। यह निर्णय सभी की भलाई के लिए लिया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति