परिवहन आयुक्त ने जिलाधिकारियों को समयबद्ध कार्यक्रम के लिए भेजा पत्र

सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने पर योगी सरकार का भी फोकस

लखनऊ
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) व युवा कार्य-खेल मंत्रालय के सहयोग से ‘सड़क सुरक्षा मित्र (Sadak Suraksha Mitra-SSM)’ कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य MYBharat प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से युवाओं को सड़क-सुरक्षा हस्तक्षेपों में संगठित रूप से जोड़ना है। इसके लिए अनुमोदित कॉन्सेप्ट नोट व रोडमैप राज्यों/जनपदों को प्रेषित किए गए हैं। प्रथम चरण में देश के 100 चयनित जनपदों में क्रियान्वयन होगा। संबंधित जिलाधिकारियों से युवाओं के समन्वित जुड़ाव व प्रगति-रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। परिवहन आयुक्त ने मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर SSM कार्यक्रम के समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु DRSC के माध्यम से नोडल व्यवस्था,  MYBharat ऑनबोर्डिंग, स्वयंसेवक चयन-प्रशिक्षण एवं मासिक KPI-आधारित समीक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। 

स्वयंसेवक के रूप में चयनित किए जाएंगे 18 से 25 वर्ष के युवा 
18–28 वर्ष के उसी जनपद के युवा, जिनके विरुद्ध कोई यातायात चालान लंबित न हो, वे चुने जाएंगे। सामान्य स्वयंसेवकों के लिए 1 सप्ताह का प्रशिक्षण (फ़र्स्ट-एड सहित) और सिविल इंजीनियर स्नातकों के लिए 15 दिन का रोड सेफ़्टी ऑडिट प्रशिक्षण निर्धारित है। इनकी भूमिकाएँ—क्रैश-सीन समन्वय, रोड सेफ़्टी ऑडिट/ब्लैक-स्पॉट अध्ययन, जागरूकता एवं एंगेजमेंट के साथ EDAR, Sanjaya, Field Perception Survey जैसे टूल्स का उपयोग अनिवार्य रहेगा। उत्कृष्ट कार्य पर प्रमाण-पत्र व Good Samaritan मान्यता/पुरस्कार का भी प्रावधान है।            

जिला सड़क सुरक्षा समिति करेगी कार्यक्रम की देखरेख 
धारा 215B, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत प्रत्येक जनपद में जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) कार्यक्रम की देखरेख करेगी। SCCoRS (29.03.2022) के निर्देशानुसार SSM को DRSC में co-opt किया जा सकता है। MoRTH के रोडमैप में T1–T12 के स्पष्ट माइलस्टोन्स (जैसे DM का MYBharat पर ऑनबोर्डिंग, DRSC बैठक, ELP प्रकाशन, प्रशिक्षण एवं फ़ील्ड एंगेजमेंट) निर्दिष्ट हैं। कार्यक्रम के अंत में DM द्वारा MoRTH व SCCoRS को समरी रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।      

उत्तर प्रदेश के चयनित 28 जनपद (MoRTH सूची के अनुसार): कानपुर नगर, बुलंदशहर, प्रयागराज, आगरा, उन्नाव, हरदोई, मथुरा, अलीगढ़, फतेहपुर, लखनऊ, सीतापुर, बरेली, गोरखपुर, कुशीनगर, बाराबंकी, जौनपुर, बदायूँ, बिजनौर, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, आज़मगढ़, मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद, रायबरेली, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी, शाहजहाँपुर, बस्ती।    

अपेक्षित प्रभाव: संरचित प्रशिक्षण, फील्ड-स्टडी और डेटा-आधारित रिपोर्टिंग से दुर्घटनाओं/गंभीर चोटों में कमी, आपात प्रतिक्रिया व साइट प्रबंधन में सुधार, तथा युवा-जन सहभागिता बढ़ेगी—जिससे दीर्घकाल में जिलास्तरीय सड़क-सुरक्षा तंत्र सुदृढ़ होगा।

शून्य जोखिम व शून्य घर्षण की नीति पर चलते हुए सड़क सुरक्षा मित्र युवाओं की ऊर्जा को सड़क-सुरक्षा के ठोस परिणामों में बदलने का राष्ट्रीय प्रयास है। भारत सरकार एवं प्रदेश शासन चाहता है कि हर जिला समयबद्ध तरीके से DRSC के माध्यम से क्रैश-सीन मैनेजमेंट, ब्लैक-स्पॉट ऑडिट और जागरूकता की संयुक्त कार्ययोजना लागू करे, ताकि दुर्घटनाएँ व मृत्यु-दर घटे, प्रतिक्रिया-समय सुधरे और नागरिकों की सुरक्षा बढ़े।
ब्रजेश नारायण सिंह, परिवहन आयुक्त

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