वंदे भारत एक्सप्रेस का नया मार्ग, लखनऊ तक के रास्ते में अब ये स्टेशन्स होंगे शामिल

नई दिल्ली
लखनऊ तक चलने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस अब अयोध्या होते हुए वाराणसी तक जाएगी। पूरी तरह वातानुकूलित इस ट्रेन के संचालन की घोषणा एक माह पूर्व की गई थी। बावजूद इसके, शुरुआती छह दिनों में चेयर कार की लगभग 200 सीटें खाली हैं। वहीं, एग्जिक्यूटिव श्रेणी में 29 अगस्त को सभी सीटें बुक हो चुकी हैं, लेकिन अन्य दिनों में 25 से अधिक सीटें खाली हैं।

मेरठ से वाराणसी का किराया
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के प्रति यात्रियों का अपेक्षित रुझान न मिलने से करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। चेयर कार में 440 और एग्जिक्यूटिव श्रेणी में 52 सीटें हैं। मेरठ से वाराणसी तक किराया क्रमशः 1915 और 3525 रुपये है, जिसमें खानपान का खर्च भी शामिल है।
 
क्या है यात्रियों की समस्या?
यात्रियों का कहना है कि ट्रेन का टाइम टेबल इसकी सबसे बड़ी समस्या है। वर्तमान में यह दिन में 782 किलोमीटर की दूरी 11 घंटे 50 मिनट में तय करती है। सप्ताह में छह दिन चलने वाली इस ट्रेन को लखनऊ और मेरठ आउटर पर प्लेटफार्म उपलब्ध न होने के कारण रोकना पड़ता है। यात्रियों की मांग है कि इसे रात में चलाया जाए और स्लीपर जैसी सोने की सुविधा दी जाए, ताकि सुबह तक गंतव्य पहुंचना संभव हो सके।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति