लगातार बरसात का असर: जंगल छोड़ नए इलाकों में पहुंचे बाघ, सफारी जोन में सन्नाटा

सवाई माधोपुर

भारी बारिश ने सवाई माधोपुर में इंसानी बस्तियां ही नहीं जंगल में बाघों को भी अपना ठिकाना बदलने पर मजबूर कर दिया है। पिछले तीन दिन की मूसलधार बारिश से रिजर्व में तालाब-नाले लबालब हो गए। जिसके चलते अब बाघ आस-पास की पहाड़ियों की ओर चले गए हैं। वहीं बाघ देखने की आस में रणथम्भौर सफारी पर आए पर्यटक अब निराश लौट  रहे हैं। गौरतलब है कि 21 अगस्त से शुरू हुई लगातार बारिश ने सवाई माधोपुर जिले में भारी बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। बाढ का पानी न सिर्फ शहर और गांवों में घुसा बल्की यहां टाइगर रिजर्व पर भी इसका बड़ा असर देाने को मिला है। बारिश ने ना सिर्फ रणथंभौर के सफारी ट्रेक को जगह जगह से छतिग्रस्त कर दिया ,बल्कि कई जगहों पर ट्रेक पूरी तरह से कट गया और जगह जगह पानी भर गया ।

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बारिश ने रिजर्व के शिकार-शिकारी के समीकरण को बदल दिया है। उन्होंने कहा, “बरसात में पहाड़ियों की घास हरी-भरी और रसीली हो जाती है, जो हिरणों को आकर्षित करती है। स्वाभाविक रूप से बाघ भी उनके पीछे-पीछे चले आते हैं। इस मौसम में अधिकांश बाघ पहाड़ी इलाकों को ही पसंद करते हैं। यह बाघों के प्रजनन का भी प्रमुख समय होता है।”

अधिकारी ने यह भी बताया कि रिजर्व में महज दो से तीन दिनों में ही महीने भर की बराबर बारिश हो गई। “जमीन को पानी सोखने का पर्याप्त समय नहीं मिला, जिससे तालाब और नाले लबालब होकर बह निकले हैं।

रणथंभौर में वर्तमान में तकरीबन 72 बाघ- बाघिन है। वही 400 से अधिक पैंथर ओर 150 से अधिक भालू हैं। हालांकि मानसून सत्र के चलते रणथंभौर में जॉन एक से पांच में पर्यटन गतिविधिया पूरी तरह से बंद है। वहीं बाहरी जोन 6 से 10 में भी बारिश के दौरान रास्ते खराब होने से सफारी बंद करनी पड़ी है। जंगल मे बारिश होने से जलभराव ओर कीचड़ की वजह से बाघों की ट्रेकिंग करना भी मुश्किल हो गया है ,बाघों के पगमार्ग बनते ही बिगड़ जाते है ऐसे में वनकर्मियों को ट्रेकिंग में भी समस्या हो रही है । शिकार की तलाश में तेंदुए और भालू जैसे अन्य जानवर भी ऊंचे इलाकों की ओर रुख कर चुके हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बारिश ने रिजर्व के शिकार-शिकारी के समीकरण को बदल दिया है। 

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