भोपाल में आया विजेता घोड़ा: ऊंची दीवारें और नदियां भी नहीं रोक सकीं

भोपाल 

घुड़सवारी की दुनिया में देश का नंबर-1 घोड़ा इस वक्त भोपाल में है। नाम है- मावलिन। उम्र 12 साल, कद 6.5 फीट और कीमत 70 लाख रुपए। घोड़ा ‘मावलिन’ का जन्म आयरलैंड में हुआ लेकिन अब यह मध्यप्रदेश राज्य घुड़सवारी अकादमी, बिशनखेड़ी का स्टार परफॉर्मर है। इसे लंबी दौड़, नदी और ऊंची-ऊंची दीवारें लांघने में महारत हासिल है।

यह अब तक 7 इंटरनेशनल और 20 नेशनल मेडल जीत चुका है। एशियन चैम्पियनशिप का प्रतिनिधित्व कर चुके राजू सिंह इसके मुख्य राइडर हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने 2007 में मप्र राज्य घुड़सवारी अकादमी की स्थापना की थी। इसकी शुरुआत 10 घोड़ों से अंकुर मैदान पर हुई। बाद में बिशनखेड़ी में शिफ्ट हुई। अब देश की महत्वपूर्ण अकादमी बन चुकी है।

एशियन चैम्पियनशिप सहित कई देशों में चमके यहां के घोड़े

घुड़सवारी सबसे कठिन, प्रतिष्ठित ओलंपिक इवेंट है। इसमें घोड़ा और घुड़सवार कई बाधाएं पार करते हैं। इनमें नदी-नाले, ऊंची दीवारें लांघना और लंबी दौड़ के साथ जंपिंग भी अहम है। यही कारण है कि इस इवेंट के लिए ऑलराउंडर घोड़ों की जरूरत होती है।

अकादमी में ऐसे छह ऑलराउंडर घोड़े है- मावलिन, मातकाली, प्रियंका, कैरेबियन बॉय, जावा और शिवालिक। इनकी जयपुर में ट्रेनिंग चल रही है। क्योंकि वहां की रेतीली जमीन बरसात में भी अभ्यास के लिए अनुकूल होती है।

हाल में खरीदे गए तीन विदेशी घोड़े अकादमी ने 2023 में तीन विदेशी घोड़े खरीदे हैं। इनमें मावलिन-जावा को आयरलैंड से, जबकि ल्यूक को जर्मनी से लिया गया है। जावा 7 साल और ल्यूक 12 साल का है।

अकादमी के खाते में 300 मेडल मप्र घुड़सवारी अकादमी ने साल 2024-25 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 7 मेडल और राष्ट्रीय स्तर पर 28 मेडल जीते। कुल मिलाकर अकादमी के खाते में अब तक 300 से ज्यादा मेडल दर्ज हो चुके हैं। राजू और मावलिन की जोड़ी स्टार है।

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