CM हिमंत बिस्वा सरमा का ऐलान: जमीन खरीद-फरोख्त पर नए नियम लागू

दिसपुर

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को घोषणा की कि असम मंत्रिमंडल ने विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच भूमि लेनदेन के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। नए नियमों के तहत यदि कोई हिंदू किसी मुस्लिम को, कोई मुस्लिम किसी हिंदू को, या कोई अन्य धर्म जैसे ईसाई, बौद्ध या जैन धर्म के व्यक्ति को जमीन बेचता है, तो इसे 'अंतर-धार्मिक लेनदेन' माना जाएगा और इसे विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा।

कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सीएम सरमा ने कहा कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में दो धार्मिक समूहों के बीच भूमि हस्तांतरण को बहुत सावधानी से संभालने की जरूरत है। इसलिए यह SOP बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह SOP केवल 'अंतर-धार्मिक लेनदेन' के लिए लागू होगी। इस दौरान उन्होंने चरण-दर-चरण प्रक्रिया भी बताई।

क्या है पूरी प्रक्रिया

  •     आवेदन सबसे पहले अंचल अधिकारी के पास जमा करना होगा
  •     प्रारंभिक सत्यापन के बाद प्रस्ताव उपायुक्त (DC) को भेजा जाएगा
  •     यदि लेनदेन एक ही धर्म के पक्षों के बीच हो, तो किसी विशेष जांच की आवश्यकता नहीं होगी
  •     अंतर-धार्मिक लेनदेन के मामले में, डीसी फाइल को राजस्व विभाग को भेजेंगे
  •     इसके बाद राजस्व विभाग का एक नोडल अधिकारी इसे असम पुलिस की विशेष शाखा (SB) को भेजेगा

विशेष शाखा चार प्रमुख बिंदुओं पर जांच करेगी

  •     भूमि स्वामित्व की वैधता और दस्तावेजों में जालसाजी की जांच
  •     क्रेता के धन के स्रोत की जांच, ताकि काले धन या अवैध लेनदेन की संभावना को खारिज किया जा सके
  •     भूमि हस्तांतरण का सामाजिक ताने-बाने पर संभावित प्रभाव
  •     राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी संभावित खतरे की जांच

इन सभी जांचों के बाद विशेष शाखा अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद डीसी अंतिम निर्णय लेगा कि लेनदेन को मंजूरी दी जाए या नहीं। यदि डीसी की ओर से मंजूरी मिलती है, तो जमीन दूसरे पक्ष के नाम पर हस्तांतरित हो जाएगी।

एनजीओ के लिए नियम

मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि यदि असम के बाहर के एनजीओ राज्य में जमीन खरीदना चाहेंगे, तो उन्हें भी इस प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि केरल जैसे कई बाहरी एनजीओ जमीन खरीदकर संस्थान स्थापित करते हैं, जो भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसे एनजीओ को इस प्रक्रिया से गुजरना होगा।" हालांकि, असम में पंजीकृत एनजीओ को इन अतिरिक्त जांचों से छूट मिलेगी।

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति