टाइगर सफारी के बाद अब चीता सफारी का रोमांच, कूनो में करें बुकिंग

भोपाल 
 टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश अब चीता स्टेट भी बन गया है. मध्यप्रदेश में अब पर्यटक खुले जंगलों में चीता सफारी का मजा ले सकेंगे. दरअसल, मध्यप्रदश के कूनो नेशनल पार्क में रोमांचक चीता सफारी शुरू होने जा रही है. इसमें पर्यटक खुली जीप में बैठकर कूनो के खुले जंगल में घूम रहे चीतों को देख सकेंगे. कूनो में हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी.

कूनो में चीता सफारी 1 अक्टूबर के बाद

कूनो पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए कूनो सफारी यादगार बनाने के लिए पर्यटन विभाग 5 अक्टूबर से कूनो नेशनल पार्क के पास कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल और 12 सितंबर से गांधी सागर फॉरेस्ट रिट्रीट शुरू करने जा रहा है. इसमें पर्यटकों के लिए टेंट सिटी, एडवेंचर गेम्स जैसी की सुविधाएं मिलेंगी.

खुली जीप में बैठकर नजदीक से देखें चीते

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में कूनो को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं. 17 सितंबर 2022 को 8 चीते नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे. इसके बाद 18 फरवरी 2023 के 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से भारत आए थे. अब कूनो नेशनल पार्क में पर्यटक खुले जंगल में चीतों का दीदार कर सकेंगे.

चीतों के दीदार के साथ प्राकृतिक सुंदरता का मजा ले सकेंगे टूरिस्ट 

पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया, '' कूनो में चीतों के दीदार होने की उम्मीद अब बहुत ज्यादा है. चीतों की संख्या भी अब बढ़ गई है. कूनो के हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी. टूरिज्म जोन इस बार ओपन रहेगा. इस बार जो भी कूनो जाएंगे वह चीता देख पाएंगे. भारत में चीता देखना अपने आप में सपने जैसा है, जो अब संभव हो सकेगा.''

कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर हुई 30

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हालांकि, पिछले तीन सालों के दौरान कई बार कूनो से दुखद खबरें भी आईं, लेकिन अब कूनो में चीतों के कुनबे में संख्या 30 पहुंच गई है. कूनो नेशनल पार्क में 9 वयस्क सहित कुल 26 चीते मौजूद हैं. 9 वयस्क चीतों में 6 मादा और 3 नर हैं. खासबात यह है कि इनमें 17 भारत में ही जन्मे शावक हैं और खुले जंगल में घूम रहे हैं.

कूनो में पर्यटन बढ़ाने पर वन विभाग व पर्यटन विभाग का जोर

कूनो में 16 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं. बाकी दो मादा चीता वीरा और नीरवा अपने नन्हें शावकों के साथ हैं, जबकि बाकी दो नर चीतों को गांधी सागर में शिफ्ट किया गया है. इस तरह मध्यप्रदेश में कुल 30 चीता मौजूद हैं.

कूनो और गांधी सागर में कर रहे डेवलपमेंट

अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया, '' चीता आने के पहले कूनो टूरिज्म के मैप पर नहीं था, लेकिन अब कूनो टूरिज्म साइट के मैप पर प्रमुखता से आ गया है. इसी उद्देश्य के लिए कूनो और गांधीसागर साइट को डेवलप किया गया है. दूसरे प्रदेश जो नहीं कर पा रहे, वह मध्यप्रदेश कर रहा है. दूसरे राज्यों में उनके प्रचलित स्थान है, जहां लगातार पर्यटकों की भीड़ बढ़ती जा रही है, जबकि मध्यप्रदेश में नए 50 स्थानों को टूरिज्म के लिए डेवलप किया जा रहा है.''

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इससे मध्यप्रदेश का पर्यटन में विविधता बढ़ रही है और पर्यटक अलग-अलग स्थानों पर पहुंच रहे हैं. कूनो और बांधवगढ़ भी तेजी से पर्यटन स्थल के रूप में अपना स्थान तेजी से बना रहे हैं.

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति