पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 50 दिनों बाद किया खुलासा, पहला सार्वजनिक बयान आया सामने

नई दिल्ली 
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद से पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने चुप्पी साधी हुई थी। हाल ही में उन्होंने इसे लेकर बयान दिया है और नए चुने गए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को बधाई दी है। धनखड़ ने कहा कि उपराष्ट्रपति का पद उनके "विशाल अनुभव" के कारण और भी अधिक गौरव प्राप्त करेगा। यह बयान 21 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन पद छोड़ने के बाद उनका पहला सार्वजनिक बयान है। राधाकृष्णन को लिखे पत्र में धनखड़ ने कहा, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और मानवता के छठे हिस्से का घर माने जाने वाले भारत के उपराष्ट्रपति के तौर पर आपके चुने जाने पर हार्दिक बधाई।"
 
जगदीप धनखड़ की खामोशी पर विपक्ष ने उठाए थे सवाल
राधाकृष्णन को लिखे अपने पत्र में धनखड़ ने आगे कहा,"इस प्रतिष्ठित पद पर आपकी पदोन्नति हमारे राष्ट्र के प्रतिनिधियों के विश्वास और भरोसे को दर्शाती है।" उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में राधाकृष्णन के "विशाल अनुभव" को देखते हुए उनके नेतृत्व में यह पद निश्चित रूप से और भी अधिक सम्मान और गौरव प्राप्त करेगा।
 
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को अचानक "स्वास्थ्य कारणों" का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस अचानक कदम से भारतीय राजनीति में हलचल मच गई थी। विपक्ष ने उनके पद छोड़ने के तरीके पर सवाल उठाए थे। इस्तीफा देने के बाद से ही धनखड़ पूरी तरह से खामोश थे, जिससे विपक्षी दलों ने उनके ठिकाने और इरादों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। उनके इस लंबे समय की चुप्पी ने कई तरह की अटकलों को जन्म दिया था, जिस पर अब उनकी प्रतिक्रिया के बाद विराम लग गया है।

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति