जानें सर्वपितृ अमावस्या पर वो वास्तु टिप्स जो दूर करेंगे सभी पितृ दोष

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। यह दिन उन सभी पूर्वजों को समर्पित होता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध सही तिथि पर नहीं हो सका। यह दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस दिन अगर कुछ विशेष वास्तु उपाय किए जाएं, तो न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति भी बनी रहती है।आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या 2025 पर किए जाने वाले 5 सरल वास्तु उपाय, जो पितृ दोष को दूर कर सकते हैं।

तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं
तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और यह सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है। पितृ दोष से जुड़ी नकारात्मक शक्तियों को यह दूर करने में सहायक होती है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन सुबह स्नान कर तुलसी के पौधे के पास तिल के तेल का दीपक जलाएं और गायत्री मंत्र या पितरों का तर्पण मंत्र पढ़ें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।

दक्षिण दिशा की सफाई और पितरों की तस्वीर का ध्यान
वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को पितृ दिशा कहा गया है। यह दिशा हमारे पूर्वजों से जुड़ी होती है। अगर यह दिशा गंदी या अव्यवस्थित हो, तो पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है। इस दिन दक्षिण दिशा की विशेष सफाई करें और वहां पितरों की तस्वीर को साफ कर अगरबत्ती, दीप आदि लगाएं। तिल जल, फूल और अक्षत अर्पण कर श्रद्धा पूर्वक नमस्कार करें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

कौओं को भोजन कराएं
कौवे को पितरों का प्रतिनिधि माना गया है। ऐसा माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर कौए को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है। चावल, घी, रोटी या पका हुआ भोजन कौओं को खिलाएं। इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को मिलता है। भोजन में काले तिल मिलाना और पीपल के पत्ते पर परोसना अत्यंत शुभ माना जाता है।

पीपल के वृक्ष की पूजा करें
पीपल का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है और यह पितरों को प्रसन्न करने का एक सशक्त माध्यम है। इससे पितृ दोष शांत होता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं, दीपक जलाएं और सात परिक्रमा करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और पितरों की कृपा बनी रहती है।

 ईशान कोण का रखें खास ध्यान
इस दिन के बाद से ही नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। यदि आप अपनी इस दिशा को साफ़-सुथरा रखते हैं तो जल्द ही आपको वास्तु दोष से मुक्ति मिलती है। इतना ही नहीं साथ में पूर्वजों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

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