5वां सबसे बड़ा निशातपुरा स्टेशन: खर्चा भारी, लेकिन पैसेंजर्स का सन्नाटा

भोपाल
राजधानी भोपाल के पास बना निशातपुरा रेलवे स्टेशन दो साल से तैयार है, पर शुरू नहीं हो पा रहा है। राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने से ट्रेनें यहां नहीं रुक रही हैं। इस स्टेशन को बनाने के पीछे वजह यह थी कि इससे भोपाल जंक्शन पर भीड़ कम हो सकती है। लगभग 500 करोड़ की लागत से बने इस स्टेशन पर यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं हैं, पर इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन पूरी तरह से तैयार है, लेकिन अनुमति नहीं मिलने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।

भोपाल का पांचवां सबसे बड़ा स्टेशन
निशातपुरा स्टेशन को भोपाल का पांचवां बड़ा रेलवे स्टेशन बनाने का प्लान था। इससे भोपाल और आसपास के लोगों को फायदा होता। साथ ही, भोपाल स्टेशन ओवर क्राउड होने से भी बच जाता। स्टेशन पर एक नया प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जहां दोनों तरफ से ट्रेनें आ सकती हैं। प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए पुल भी है।

यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं
स्टेशन में टिकट काउंटर, टॉयलेट और वेटिंग एरिया जैसी सुविधाएं हैं। स्टेशन तक पहुंचने के लिए सड़क भी बनाई गई है। निशातपुरा स्टेशन बनाने का मुख्य उद्देश्य भोपाल जंक्शन पर होने वाली देरी को कम करना था। अभी इंदौर और पश्चिमी रेलवे की तरफ से आने वाली ट्रेनों को भोपाल में प्लेटफॉर्म खाली न होने पर निशातपुरा में रोकना पड़ता है। लेकिन यहां यात्री उतर या चढ़ नहीं पाते, क्योंकि स्टेशन चालू नहीं है।

इंजन को घुमाना भी बड़ी समस्या
एक और बड़ी समस्या इंजन को घुमाना है। पश्चिमी रेलवे से आने वाली ट्रेनों को बीना की तरफ जाने के लिए भोपाल स्टेशन पर इंजन घुमाना पड़ता है। इसमें 30 से 40 मिनट लगते हैं और प्लेटफॉर्म रुक जाता है। रेलवे के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इंजन घुमाने का काम अब निशातपुरा में हो सकता है। इससे भोपाल स्टेशन पर जगह खाली होगी और लंबी दूरी की ट्रेनों का समय बचेगा।

यात्रियों के इंतजार में स्टेशन
स्टेशन के शुरू न होने से यह बेकार हो सकता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि 'बुनियादी ढांचा पूरी तरह से तैयार है, लेकिन ठहराव की अनुमति के अभाव में यात्रियों और रेलवे प्रणाली दोनों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।'

 

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