विकसित भारत का संकल्प पूरा करने में अभियंताओं की महत्वपूर्ण भूमिका : जल संसाधन मंत्री सिलावट

भारत रत्न सर श्री विश्वेश्वरैया की प्रतिमा का किया अनावरण

भोपाल 
जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने में अभियंताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत रत्न सर श्री मोक्षगुण्डम विश्वेश्वरैया विलक्षण प्रतिभा के धनी, दूरदृष्टा और अत्यंत कुशल अभियंता थे, जिन्होंने संघर्षों के बीच कार्य करते हुए उत्कृष्ट अभियांत्रिकी के मानदण्डों को स्थापित किया। उनसे प्रेरणा लेकर सभी अभियंता पूरी निष्ठा, भाव और समर्पण के साथ देश के विकास में अपना पूरा योगदान दें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। जल संरक्षण में देश में प्रदेश अव्वल है।

जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट मंगलवार को प्रमुख अभियंता जल संसाधन कार्यालय परिसर में सर श्री मोक्षगुण्डम विश्वेश्वरैया की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर प्रतिवर्ष उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 अभियंताओं को सम्मानित करने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभियंता एवं विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि सर श्री विश्वेश्वरैया की कर्मठता, विद्वता, कौशल और समर्पण ने आधुनिक भारत के निर्माण की मजबूत नींव रखी। उनके द्वारा अभियांत्रिकी क्षेत्र में किये गये कार्य भविष्य में भी अभियंताओं के लिये प्रेरणा-स्रोत रहेंगे। जल प्रबंधन के क्षेत्र में उनका कार्य अद्वितीय है। आज उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया है, जो हमें निरंतर उनके कार्यों की याद दिलाती रहेगी। वे भारत के गौरव थे, आज उन्हें पूरा विश्व याद करता है।

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल संसाधन, जल प्रबंधन और जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हो रहा है। प्रदेश में 3 बड़ी परियोजनाओं केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और तापी मेगा रीचॉर्ज पर कार्य हो रहा है। ये परियोजनाएँ पूरे प्रदेश की तस्वीर बदल देंगी। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर लगभग 52 लाख हेक्टेयर हो गया है। अगले वर्ष तक इसे 65 लाख हेक्टेयर और वर्ष 2027 तक 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। राजगढ़ जिले की मोहनपुरा-कुण्डालिया परियोजना जल संरक्षण की विलक्षण परियोजना है। गत दिनों प्रदेश में चलाया गया 'जल गंगा संवर्धन अभियान' अत्यंत सफल रहा। 'एक पेड़ माँ के नाम' पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। हर खेत तक पानी पहुँचाना हमारा संकल्प है। भारत की आत्मा गाँव में बसती है और सिंचाई का रकबा बढ़ने से गाँव समृद्ध होंगे और देश भी समृद्ध होगा।

अभियंताओं को किया सम्मानित
जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने विभाग के पूर्व और वर्तमान अभियंताओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रमुख अभियंता श्री विनोद कुमार देवड़ा, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता श्री राजीव शुकलेकर, श्री आर.के. तिवारी, श्री एम.एस. डाबर, श्री भरत गोस्वामी ने भी संबोधन दिया।

 

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति