‘लोकल टू वोकल’ को नई उड़ान: यूपी के हर जिले में लगेंगे स्वदेशी मेले, कारीगरों की चमक बढ़ेगी

लखनऊ 
उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए इस दीपावली कुछ खास होने वाला है। राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है जिसके तहत इस साल दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 'स्वदेशी मेला' लगाया जाएगा। इन मेलों में स्थानीय कारीगर, हस्तशिल्पी और छोटे उद्यमी अपने उत्पादों को सीधे जनता के सामने पेश कर सकेंगे। यह आयोजन उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) के बैनर तले होगा, जिसकी थीम “स्वदेशी उत्पाद और लोकल से वोकल” होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पहल को हरी झंडी दे दी है।

सभी जिलों में 9-10 दिन तक चलेगा मेला
MSME मंत्री राकेश सचान ने बताया कि पहले यह मेला सिर्फ 18 मंडलों में ही लगता था, लेकिन अब इसे पूरे प्रदेश में फैलाया जा रहा है। प्रत्येक जिले में यह मेला करीब 9 से 10 दिनों तक चलेगा और इसका उद्घाटन स्थानीय मंत्री या विधायक करेंगे।

कारीगरों और छोटे उद्यमियों को मिलेगा बड़ा मंच
इस पहल का मकसद है कि स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों को सीधा बाजार मिले, ताकि वे अपने सामान बेचकर अच्छी कमाई कर सकें। खास बात ये है कि इन मेलों में हर जिले के ODOP (One District One Product) और GI टैग प्राप्त उत्पादों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे न केवल लोगों को अपने जिले के उत्पादों के बारे में जानकारी मिलेगी, बल्कि वे अन्य जिलों और राज्यों के खास उत्पाद भी देख और खरीद सकेंगे।

उपभोक्ताओं को मिलेगा सही दाम पर गुणवत्तापूर्ण सामान
मेले में बिक्री होने वाले सभी उत्पादों की कीमतों में पारदर्शिता होगी। GST सुधारों की वजह से ग्राहक सही दाम में सामान खरीद पाएंगे। मंत्री सचान ने कहा कि यह पहल कारीगरों की आय तो बढ़ाएगी ही, साथ ही उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण और सस्ते उत्पाद मिलेंगे।
 
हर जिले में खुलेंगे 'यूनिटी मॉल'
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जल्द ही प्रदेश के सभी 75 जिलों में 'यूनिटी मॉल' बनाए जाएंगे। फिलहाल लखनऊ, वाराणसी और आगरा में केंद्र सरकार की मदद से यूनिटी मॉल की स्थापना शुरू हो चुकी है। इन मॉल्स में हर जिले के खास उत्पादों के साथ-साथ देशभर के ODOP उत्पाद भी मिलेंगे। इसका मकसद है कि एक ही जगह पर देशी और विविधता भरे उत्पाद उपलब्ध हों, जिससे न सिर्फ बिक्री बढ़े बल्कि स्थानीय कारीगरों को पहचान भी मिले।

'वोकल फॉर लोकल' को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
मंत्री सचान ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'लोकल टू वोकल' अभियान को आगे बढ़ाने का एक मजबूत कदम है। इससे कारीगरों की आमदनी बढ़ेगी और लोगों को भी भारतीय उत्पादों के प्रति ज्यादा रुझान और भरोसा बनेगा।

डिजिटल और सोशल मीडिया से होगा प्रचार
इस बार मेलों के प्रचार-प्रसार में डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी सहारा लिया जाएगा। इससे न केवल यूपी बल्कि पूरे देश के लोग इन मेलों के बारे में जान पाएंगे और ऑनलाइन खरीदारी का भी विकल्प उपलब्ध होगा। यह पहल छोटे और मध्यम व्यवसायियों को राष्ट्रीय और डिजिटल बाजार तक पहुंचने में मदद करेगी।

अगले साल और भी भव्य होगा आयोजन
UPITS 2025 का तीसरा संस्करण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अब इसकी अगली कड़ी 25 से 29 सितंबर 2026 तक और भी बड़े पैमाने पर आयोजित की जाएगी। मंत्री ने कहा कि इस बार जो कमियाँ देखी गईं, उन्हें सुधार कर अगले आयोजन को और बेहतर और व्यवस्थित बनाया जाएगा।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति