जिंदल स्टील ने आंगुल में नया 3 एमटीपीए बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (BOF) चालू किया, इस्पात निर्माण क्षमता बढ़कर 9 एमटीपीए हुई

जिंदल स्टील ने आंगुल में 3 एमटीपीए क्षमता वाला नया बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (BOF) चालू किया है, जिससे कच्चे इस्पात निर्माण की क्षमता 6 एमटीपीए से बढ़कर 9 एमटीपीए हो गई है।
ब्लास्ट फर्नेस-2 के साथ यह विस्तार हॉट मेटल और इस्पात निर्माण क्षमताओं को समन्वित करता है, जिससे डाउनस्ट्रीम उत्पादों में अधिक उत्पादन सुनिश्चित होगा।

रायपुर 
जिंदल स्टील ने आंगुल के एकीकृत इस्पात संयंत्र में 250 एमटी बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (BOF) कन्वर्टर का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया है, जिससे 3 एमटीपीए की अतिरिक्त कच्चे इस्पात निर्माण क्षमता जुड़ गई है। पहले हीट (Heat) के सफल उत्पादन के साथ कंपनी की कुल क्षमता आंगुल में 6 एमटीपीए से बढ़कर 9 एमटीपीए हो गई है। इससे आंगुल को चालू वित्तीय वर्ष में 12 एमटीपीए क्षमता हासिल करने के लक्ष्य के और करीब पहुँचा दिया है।

ब्लास्ट फर्नेस-2 और BOF कन्वर्टर के समन्वित कमीशनिंग ने भारत की इस्पात आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। इस एकीकृत प्रवाह से डाउनस्ट्रीम मिलों को लगातार भारतीय इस्पात की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जो अवसंरचना, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, तेल एवं गैस तथा रियल एस्टेट क्षेत्रों की जरूरतें पूरी करेगा।

“नया BOF अब चालू हो गया है और पहला हीट सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया है। इसके साथ, आंगुल ने इस्पात निर्माण में असली ताकत हासिल की है। यहां हम जो भी टन इस्पात बनाते हैं, वह भारत की अपनी क्षमता पर निर्भर रहने की ताकत को और मजबूत करता है,” जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल ने कहा।

जिंदल स्टील के बारे में
जिंदल स्टील भारत के प्रमुख एकीकृत इस्पात उत्पादकों में से एक है, जो अपने पैमाने, दक्षता और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध है। मजबूत माइन-टू-मेटल मॉडल पर आधारित, कंपनी कैप्टिव संसाधनों, उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और वैश्विक वितरण नेटवर्क का उपयोग करते हुए उच्च-प्रदर्शन इस्पात समाधान प्रदान करती है। 12 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश के साथ, जिंदल स्टील आंगुल, रायगढ़ और पतरातु में अत्याधुनिक संयंत्र संचालित करता है और भारत एवं अफ्रीका में रणनीतिक परिचालन बनाए रखता है। इसका विविध और भविष्य-उन्मुख उत्पाद पोर्टफोलियो अवसंरचना, निर्माण और विनिर्माण जैसे मुख्य क्षेत्रों को सशक्त बनाता है, जिससे मजबूती और सतत विकास के साथ प्रगति को गति मिलती है।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति