भोपाल की सड़कें बनीं जानलेवा, ट्रैफिक पुलिस ने बताए 16 हादसे वाले पॉइंट, 5 स्थान बेहद संवेदनशील

भोपाल
राजधानी में सड़क सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस साल 1 जनवरी से 31 अगस्त के बीच, शहर में सड़क हादसों में 21 लोगों की जान गई और 75 घायल हुए। यह आंकड़ा सिर्फ मिसरोद पुलिस स्टेशन इलाके का है, जो शहर के सबसे खतरनाक ब्लैकस्पॉट 'ग्यारह मील' के पास स्थित है।

तीसरे नंबर पर कोलार पुलिस स्टेशन का इलाका
आंकड़ों के मुताबिक, मिसरोद पुलिस स्टेशन इलाके में 114 सड़क हादसों में 21 लोगों की मौत हुई और 75 लोग घायल हुए। इसके बाद कोह-ए-फिजा का नंबर आता है, जहां 132 हादसों में 16 लोगों की जान गई और 102 घायल हुए। तीसरे नंबर पर कोलार पुलिस स्टेशन इलाका है, जहां 100 हादसों में 15 लोगों की मौत हुई और 93 घायल हुए।

कहां हुईं सबसे ज्यादा मौत
पूरे शहर की बात करें तो, जोन-4 में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। इस जोन में 479 हादसों में 60 लोगों की जान गई और 372 लोग घायल हुए। जोन-4 में कोलार, चुनाभट्टी, निशातपुरा, छोला, गांधी नगर, खुजरी और बैरागढ़ पुलिस स्टेशन इलाके आते हैं। जोन-2 में 667 हादसों में 47 मौतें और 480 घायल हुए। जोन-1 में 461 हादसों में 24 मौतें और 379 घायल हुए। वहीं, जोन-3 में 319 हादसों में 26 मौतें और 242 घायल हुए।

मिसरोद सबसे खतरनाक स्पॉट
मिसरोद इलाका भोपाल-होशंगाबाद हाईवे पर पड़ता है और यहां ट्रैफिक बहुत ज्यादा रहता है। इसी वजह से यहां लगातार हादसे हो रहे हैं। ट्रैफिक अधिकारी बताते हैं कि तेज रफ्तार, लापरवाही से गाड़ी चलाना और सड़क नियमों का पालन न करना हादसों के मुख्य कारण हैं। अतिरिक्त डीसीपी (ट्रैफिक) बसंत कौल ने बताया कि मिसरोद में होशंगाबाद रोड और जोन-4 में इंदौर रोड पर हादसे ज्यादा होते हैं।

रात में ज्यादा हादसे
रात में भारी वाहन तेज रफ्तार से शहर की सड़कों पर आते हैं, जिससे खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, देर रात पार्टी करने वाले युवा भी तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हैं और हेलमेट व सीटबेल्ट का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे रात में होने वाले हादसों का खतरा बढ़ जाता है। कौल ने यह भी कहा कि पुलिस, लोक निर्माण विभाग और भोपाल नगर निगम के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है, खासकर जोन-4 के हादसों के आंकड़ों का विश्लेषण करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए।

ट्रैफिक पुलिस ने ढूंढे 16 ब्लैक स्पॉट
भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही शहर में 16 'ब्लैक स्पॉट्स' (ज्यादा हादसे वाली जगहें) की पहचान की थी। यह पहचान पिछले तीन सालों (2022-2024) के हादसों के आंकड़ों के आधार पर की गई थी। हालांकि, इन जगहों पर इंजीनियरिंग की खामियों को दूर करने के लिए बार-बार सिफारिशें की गईं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि कुछ जगहों पर सिर्फ अस्थायी समाधान किए गए, जबकि असली समस्या जस की तस बनी हुई है।

 

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