पंडित जी से जानें: देवउठनी एकादशी पर व्रत, पूजन और पारण का शुभ समय

हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का खास महत्व है। देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं। इस दिन से ही शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मुक्ति पाता है। इस बार एकादशी पर भद्रा व पंचक का साया रहने वाला है। हिंदू धर्म में भद्रा व पंचक को शुभ व कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। जानें पंडित जी से इस साल देवउठनी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, पूजन व व्रत पारण का समय-

देवउठनी एकादशी व्रत कब है: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर प्रारंभ होगी और 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, उदयातिथि में देवउठनी एकादशी व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा।

देवउठनी एकादशी पूजन मुहूर्त 2025: देवउठनी एकादशी पर पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 50 मिनट से सुबह 05 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। पूजन का अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 11 बजकर 17 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 06 बजकर 33 मिनट से शाम 06 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।

देवउठनी एकादशी पर भद्रा व पंचक कब से कब तक: देवउठनी एकादशी के दिन पंचक पूरे दिन रहेगा, जबकि भद्राकाल रात 08 बजकर 27 मिनट से अगले दिन सुबह 06 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

देवउठनी एकादशी व्रत पारण का समय: देवउठनी एकादशी व्रत का पारण 2 नवंबर को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 11 मिनट से दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय दोपहर 12 बजकर 55 मिनट है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं करना चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है।

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