Car Loan में छूट: ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और LTV अनुपात में बढ़ोतरी

नई दिल्ली

 क्या आप अपनी ड्रीम कार खरीदने का सपना देख रही हैं? तो आपके लिए बड़ी खबर है! भारतीय बैंक अब महिला कार खरीदारों को खास तवज्जो दे रहे हैं, जिसका सीधा फायदा आपको लोन डील्स में मिल सकता है. एक समय था जब हर किसी के लिए लोन की शर्तें लगभग एक जैसी होती थीं, लेकिन अब जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा देने और महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ाने के लिए बैंकों ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं, वह भी खास छूट के साथ.

महिलाओं को क्या खास फायदा मिल रहा है?
महिला कार लोन आवेदकों को मानक दरों की तुलना में लगभग 5-10 आधार अंक तक कम ब्याज दर की पेशकश की जा रही है. इसका मतलब है कि आपको कम ईएमआई भरनी पड़ेगी, जिससे आपकी जेब पर बोझ कम होगा.

लेकिन फायदा सिर्फ ब्याज दर तक सीमित नहीं है. बैंक प्रोसेसिंग फीस में भी कटौती कर रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण—लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात बढ़ा रहे हैं. कैनरा बैंक जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 0.50% तक कम दरें और सड़क पर कीमत (ऑन-रोड प्राइस) का 90% तक फंडिंग दे रहे हैं! कुछ मामलों में तो यह फंडिंग ऑन-रोड कीमत तक भी बढ़ सकती है, जिससे आपकी डाउन पेमेंट की चिंता काफी कम हो जाती है.

इन लाभों का फायदा कैसे उठाएं?

अगर आप इन विशेष लाभों का फायदा उठाना चाहती हैं, तो कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी:

प्राथमिक आवेदक: लोन के लिए महिला को ही प्राथमिक आवेदक होना चाहिए.

रजिस्ट्रेशन: वाहन का रजिस्ट्रेशन भी महिला के नाम पर होना चाहिए.

एलिजिबिलिटी: एलिजिबिलिटी मानदंड लगभग सामान्य ही हैं.

उम्र: 21 से 65 वर्ष.

दस्तावेज: वैध केवाईसी (KYC) और आय का प्रमाण.

क्रेडिट स्कोर: 750 से ऊपर का अच्छा क्रेडिट स्कोर होना बेहतर है.

ये शर्तें यह सुनिश्चित करती हैं कि वित्तीय लाभ और स्वामित्व दोनों ही महिला उधारकर्ता के पास रहें. इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है, जिसमें कम दस्तावेज़ और तेज़ अनुमोदन शामिल हैं.

बैंक क्यों दे रहे हैं ये आकर्षक स्कीम?
अमित सेठिया बताते हैं कि इन विशेष योजनाओं को शुरू करने के पीछे बैंकों का मुख्य उद्देश्य वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है. बैंक महिलाओं की विश्वसनीयता को जिम्मेदार उधारकर्ता के रूप में पहचानते हैं. इन पहलों से महिलाओं को संपत्ति मालिक (Asset Owners) के रूप में सशक्तिकरण मिलता है और उनकी वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में वृद्धि होती है. आरबीआई की रेपो दर स्थिर होने के बावजूद, बैंक इन लिंग-विशिष्ट ऑफर्स और त्योहारी छूट का उपयोग करके क्रेडिट पहुंच बढ़ा रहे हैं, जो सीधे तौर पर महिलाओं की आर्थिक गतिशीलता को समर्थन देता है. 

admin

Related Posts

आज शेयर मार्केट में रौनक, 6 लाख करोड़ की बढ़त के साथ निवेशकों ने उड़ाई खुशी

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शानदार तेजी देखने को मिली. सेंसेक्‍स और निफ्टी ने आखिरी कुछ घंटों में कमाल की तेजी दिखाई, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियों में तगड़ी…

सारा खेल पलटा! भारत-EU डील ने अमेरिका की सोच पर डाला दबाव

 नई दिल्ली     भारत-EU डील अमेरिका के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह साफ संदेश देती है कि अब भारत अब किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा. इसी कड़ी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति