जब 2017 में टूटा था भारत का सपना… अब महिला टीम के पास बदला लेने का मौका

नई दिल्ली 
हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम महिला एकदिवसीय विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुकी है। गुरुवार को सेमीफाइनल में उसने 7 बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को रिकॉर्ड रनों का पीछा करते हुए हराया। अब हरमनप्रीत कौर आर्मी भारतीय महिला क्रिकेट की वो गौरवशाली गाथा लिखने की दहलीज पर खड़ी है जो अतीत में लिखते-लिखते रह गई थी। कौर के जेहन में 2017 की वो दिल तोड़ने वाली फाइनल की हार ताजा होगी और उनकी अगुआई में टीम इस बार वो कसर पूरी करने के लिए जी जान लगाएगी।

2017 में भारत के विश्व कप जीतने का सपना टूटा था। तब सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को ही शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई थी। सेमी में हरमनप्रीत कौर ने 115 गेंदों में 171 रनों की बेमिसाल तूफानी पारी खेली थी और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 36 रन से हराया था। उसके बाद लगा कि 2017 महिला क्रिकेट के लिए 1983 बनने वाला है जब पुरुष टीम ने पहली बार विश्व विजय हासिल की थी। लेकिन वो हो न सका।

फाइनल में भारत को मेजबान इंग्लैंड के हाथों 9 रन से शिकस्त झेलनी पड़ी। 8 गेंदें बाकी थीं लेकिन पूरी भारतीय टीम आउट हो चुकी थी। तब इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 228 रन का स्कोर खड़ा किया था।

जीत के लिए 229 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 5 रन के टीम स्कोर पर स्मृति मंधाना बिना खाता खोले आउट हो गईं। 43 रन पर भारत को दूसरा झटका लग गया और कप्तान मिताली राज दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गईं। उसके बाद हरमनप्रीत कौर और पूनम राउत ने तीसरे विकेट के लिए 95 रनों की साझेदारी की। हरमनप्रीत 51 रन बनाकर आउट हुईं। भारत को चौथा झटका पूनम राउत के रूप में लगा जो शतक की तरफ बढ़ रही थीं। उन्होंने 86 रन की शानदार पारी खेली। भारत तब भी जीत की स्थिति में था। तब भारत का स्कोर 191 रन था और जीत के लिए 43 गेंदों में सिर्फ 38 रन चाहिए थे और हाथ में बचे थे 6 विकेट।

स्कोर बोर्ड में अभी 5 रन ही जुड़े थे कि भारत को सुषमा वर्मा के रूप में पांचवां झटका लगा। 45वें ओवर में एक समय भारत का स्कोर 6 विकेट के नुकसान पर 201 रन था। तब भी जीत मुट्ठी में लग रही थी। लेकिन तभी झूलन गोस्वामी के रूप में सातवां झटका लगा। 47.2 ओवर में स्कोर था 7 विकेट के नुकसान पर 218 रन। तब 20 गेंद में सिर्फ 11 रन चाहिए थे। लेकिन 2 रन के अंतराल पर ही भारत के आखिरी 3 विकेट गिर गए और एक नया इतिहास रचते-रचते रह गया। करोड़ों दिल टूट गए। मेजबान इंग्लैंड ने विश्व कप अपने नाम कर लिया था।

अब भारत के पास उस टीस को खत्म करने, उस कसर को पूरा करने का सुनहरा मौका है। 2 नवंबर को फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के सामने उस अधूरी कहानी को पूरा करने का मौका है। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने जिस विलक्षण जज्बे, जुनून और हौसले का मुजाहिरा किया है, वो उम्मीद जगाता है- अबकी बार 2017 वाली कसर पूरी होकर रहेगी।

 

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