म्युनिख ओलंपिक 1972 कांस्य पदक विजेता हॉकी गोलकीपर फ्रेडरिक का निधन

नई दिल्ली
भारतीय पुरूष हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर और म्युनिख ओलंपिक 1972 की कांस्य पदक विजेता टीम के सदस्य मैनुअल फ्रेडरिक का शुक्रवार को सुबह बेंगलुरू में निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे और उनके परिवार में दो बेटियां हैं। वह पिछले दस महीने से प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे।

केरल के कन्नूर में 20 अक्टूबर 1947 को जन्मे फ्रेडरिक ओलंपिक पदक जीतने वाले प्रदेश के पहले खिलाड़ी थे। उनके अलावा केरल से पी आर श्रीजेश ने तोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीता है और वह भी हॉकी गोलकीपर रहे हैं।

काफी पहले बेंगलुरू में आ बसे फ्रेडरिक एक साल पहले पत्नी शीतला के निधन के बाद से अवसाद में भी थे। उनकी बेटी फ्रेशना ने कहा, ‘‘डैड का सुबह निधन हो गया। वह पिछले दस महीने से कैंसर से जूझ रहे थे और एक साल पहले मां के जाने के बाद से अवसाद में भी थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें पीलिया भी हो गया था जिससे उनका लिवर प्रभावित हुआ और उनकी हालत बिगड़ गई।’ फ्रेडरिक को 2019 में खेलों में आजीवन उपलब्धियों के लिये मेजर ध्यानचंद पुरस्कार भी दिया गया था।

 

admin

Related Posts

AUS vs PAK क्लैश: विश्व कप वार्म-अप में कौन दिखाएगा असली दम?

नई दिल्ली टी20 विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच 3 मैच की सीरीज गुरुवार से शुरू हो रही है। इसके जरिए पाकिस्तानी टीम को विश्व कप की…

तारीफ कम पड़ेगी — अभिषेक शर्मा ने पावर हिटिंग में क्रिस गेल को छोड़ा पीछे, कैफ का बड़ा बयान

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा है कि वह निरंतरता के साथ आक्रामक बल्लेबाजी के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति