रेल हादसे में मलबे से जिंदा निकला बच्चा, पर माता-पिता का कोई सुराग नहीं

बिलासपुर

छत्तीसगढ़ में 4 नवंबर की शाम बिलासपुर स्टेशन के पास दर्दनाक रेल हादसा हो गया. तेज रफ्तार में आ रही मेमू लोकल ट्रेन एक खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई, जिसमें 11 यात्रियों की मौत हो गई और करीब 20 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. मलबे के बीच चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था, लेकिन इसी भयावह दृश्य के बीच एक मासूम बच्चे की जिंदगी बच गई.

हादसे में घायल इस बच्चे के माता-पिता का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है. रेल प्रशासन और स्थानीय लोगों ने जब राहत अभियान शुरू किया, तो मलबे के पास यह मासूम घायल हालत में मिला. उसे तुरंत रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. 

दर्दनाक बात यह है कि बच्चे के माता-पिता का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. रेलवे प्रशासन ने अपील की है कि जो भी व्यक्ति बच्चे के माता-पिता या परिजनों के बारे में जानकारी रखता हो, वह तुरंत रेलवे अस्पताल या बिलासपुर रेल कंट्रोल रूम से संपर्क करे.

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने कहा है कि घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था. एनडीआरएफ, रेलवे पुलिस, स्थानीय पुलिस और मेडिकल टीमों ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन चलाया. सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है. रेल प्रशासन ने प्राथमिक राहत के रूप में सभी घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की है. वरिष्ठ अधिकारी लगातार अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं और घायलों से मिलकर उनका हालचाल पूछ रहे हैं.

इस हादसे में जहां कई परिवारों का सबकुछ खत्म हो गया, वहीं एक मासूम इस हादसे में बच गया, लेकिन उसके माता-पिता का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है. अस्पताल में टीम उसका इलाज कर रही है.

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि MEMU लोकल ट्रेन ने सिग्नल को पार करते हुए खड़ी मालगाड़ी के पिछले हिस्से में जोरदार टक्कर मार दी, जिससे ओवरहेड तारों, सिग्नलिंग सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा और ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए. यह हादसा बिलासपुर-कटनी रेलखंड पर हुआ, जिसके कारण इस रूट पर रेल संचालन को तत्काल प्रभाव से रोकना पड़ा.

रेलवे ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने यात्रियों और उनके परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए हैं, ताकि जरूरतमंद लोग राहत, जानकारी या अपने लापता प्रियजनों के बारे में पता कर सकें. बिलासपुर के लिए 7777857335 और 7869953330, चांपा के लिए 8085956528, रायगढ़ 9752485600, पेंड्रा रोड 8294730162, कोरबा 7869953330, उसलापुर 7777857338 और दुर्घटनास्थल से सीधे संपर्क के लिए 9752485499 व 8602007202 नंबर जारी किए गए हैं.

हादसे की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शोक व्यक्त करते हुए इसे बेहद दुःखद बताया और कहा कि उन्होंने जिलाधिकारियों को त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी गंभीरता से जुटने के निर्देश दिए हैं. वहीं, रेलवे ने राहत की घोषणा करते हुए मृतकों के परिजनों को 10 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख और साधारण घायलों को 1 लाख की राशि देने की बात कही है.

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति