चीन ने समुद्र में उतारा नया दैत्याकार पोत, तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल

फुजियान 

 चीन ने  अपना सबसे उन्नत एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान आधिकारिक रूप से सेना में शामिल कर लिया. यह चीन का पहला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट प्रणाली से लैस एयरक्राफ्ट कैरियर है. इस लॉन्च के साथ अब चीन के पास तीन विमानवाहक पोत हैं. यह समुद्र में एक तरह का तैरता शहर जैसा होगा, जो किसी भी देश का काल बन सकता है. शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को फुजियान के कमीशनिंग और झंडा प्रदान समारोह में भाग लिया. शी जिनपिंग ने सान्या शहर के एक नौसैनिक बंदरगाह पर जाकर इस विमानवाहक पोत का निरीक्षण भी किया.

फुजियान को जून 2022 में लॉन्च किया गया था और इसका नाम फुजियान प्रांत के नाम पर रखा गया है. चीनी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फुजियान का कमीशन होना पीएलए नौसेना के कोस्टल सिक्योरिटी से दूर समुद्री रक्षा की दिशा में हुए बदलाव की एक बड़ी उपलब्धि है. यह इस बात का प्रतीक है कि चीन अब तीन विमानवाहक पोतों के युग में प्रवेश कर चुका है. उसके इस नए एयरक्राफ्ट में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट प्रणाली भी है.

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट प्रणाली के उपयोग से विमान पूरे ईंधन और हथियारों के साथ टेकऑफ (take-off) कर सकते हैं, जिससे उनका युद्ध क्षेत्रीय दायरा बढ़ता है. यह हमलावर क्षमता में बढ़ोतरी करता है. इसके साथ ही यह प्रणाली एयरक्राफ्ट सॉर्टी रेट में भी अहम बढ़ोतरी की भी अनुमति देती है. यह चीन द्वारा खुद ही डिजाइन किया गया और पूरी तरह तैयार किया गया है. यानी पूरी तरह से इंडिजिनस. चीन अब अमेरिका के अलावा दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसके पास दो से ज्यादा युद्धपोत हैं. 

इस युद्धपोत का निर्माण कार्य 2019 में शंघाई के जियांगन शिपयार्ड में शुरू हुआ था. इसे 17 जून 2022 को समुद्र में उतारा गया था. 2024 से इसके समुद्री परीक्षण शुरू हुए और इसे आठ बार समुद्र में उतारा गया. कुल मिलाकर 117 दिनों की परीक्षण प्रक्रिया के बाद चीन ने मात्र छह वर्षों में इस एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण और ट्रायल दोनों सफलतापूर्वक पूरे कर लिए. वहीं अमेरिका के फोर्ड-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर को निर्माण से लेकर कमीशनिंग तक पहुंचने में करीब 16 साल लगे थे. 

22 सितंबर को, पीएलए नौसेना ने घोषणा की थी कि फुजियान ने पहला कैटापल्ट-असिस्टेड टेकऑफ और अरेस्टेड लैंडिंग ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है. इसमें J-15T भारी लड़ाकू विमान, J-35 स्टील्थ फाइटर और KJ-600 प्रारंभिक चेतावनी विमान शामिल थे. ग्लोबल टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि इन विमानों के साथ J-15DT इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान को भी 3 सितंबर को बीजिंग में आयोजित चीन के वी-डे सैन्य परेड में प्रदर्शित किया गया था.

फुजियान का फुल लोड डिस्प्लेसमेंट 80,000 टन से अधिक है. यह दैत्याकार एयरक्राफ्ट कैरियर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट के साथ अरेस्टिंग डिवाइस से भी लैस है. मई 2024 में अपनी पहली समुद्री परीक्षण के बाद से फुजियान ने निर्धारित योजना के अनुसार कई समुद्री परीक्षण किए हैं, जिनमें उपकरणों के कमीशनिंग और ऑपरेशन स्टैबिलिटी का मूल्यांकन भी शामिल है.

फुजियान के आने से चीन की ताकत न केवल दक्षिणी चीन सागर और पूर्वी एशिया में बढ़ेगी, बल्कि हिंद महासागर में भी वह अपना प्रभुत्व दिखा सकेगा. वहीं बीते दिनों अमेरिका ने चीन के पूर्वी समुद्री क्षेत्र यानी एशिया पैसिफिक में अपने कई युद्धपोत उतारे थे. ये दक्षिण कोरिया और जापान से लेकर बांग्लादेश तक यात्रा पर रहे. वहीं चीन के इस युद्धपोत से भारत के लिए भी मुश्किल खड़ी हो सकती है. भारत हिंद महासागर को अपना क्षेत्र मानता है, लेकिन चीन अपनी दादागिरी दिखाने के लिए, जल्द ही कोई हरकत कर सकता है. अफ्रीका से पूर्वी क्षेत्र से लेकर मलक्का तक भारत सुरक्षा गारंटर बनना चाहता है, तो उसे चीन की हरकतों पर नजर रखनी पड़ेगी. 

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