खाली हाथ लौटा पाकिस्तान: शांति बातचीत में अफगानिस्तान की सख्ती भारी

अफगानिस्तान 
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता एक बार फिर बेनतीजा ही खत्म हो गई है। दोनों देशों के बीच तीसरे दौर की शांति वार्ता तुर्किए और कतर की मध्यस्थता में इस्तांबुल में चल रही थी। पाकिस्तान का कहना था कि वह आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। हालांकि अफगानिस्तान ने उससे तहरीक-ए-तालिबान पर लगाम लगाने जैसा कोई भी वादा लिखित तौर पर नहीं किया है। अफगानिस्तान का कहना है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल आतंकवाद लिए नहीं होने देता है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत खत्म हो गई है और चौथे चरण की वार्ता को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है। बता दें कि गुरुवार को दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हुई थी। पाकिस्तान चाहता था कि अफगानिस्तान लिखित में दे कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ ऐक्शन लेगा। ख्वाजा आसिफ ने तुर्की और कतर को मध्यसत्थता और तनाव को कम करवाने के लिए धन्यवाद दिया है।

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान उनकी बात मानने को तैयार था लेकिन लिखित में समझौता करने के तैयार नहीं हुआ। आसिफ ने कहा कि मध्सत्थता करने वाले देशों ने अपनी तरफ से प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ी। ख्वाजा आसिफ ने कहा, अगर वे आशावादी होते तो हमें रुकने के लिए कहा होता। हमें खाली हाथ लौटना पड़ा और इससे पता लगता है कि काबुल से वे भी निराश हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का स्टैंड अब भी बदला नहीं है।

पिछले महीने खुले सीमा विवाद के कारण इस्लामाबाद और काबुल के बीच उत्पन्न तनाव को कम करने के लिए इस्तांबुल में तीसरे दौर की वार्ता शुरू हुई थी। इससे पहले, 19 अक्टूबर को दोहा और 25 अक्टूबर को इस्तांबुल में हुई दो दौर की वार्ताओं में दोनों पक्ष विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बनाने में विफल रहे थे।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 11 से 15 अक्टूबर के बीच हुई झड़पों में दोनों पक्षों ने मानव क्षति की पुष्टि की थी। हालांकि, एक अस्थायी संघर्ष विराम के बाद स्थिति को काबू में लाया गया था। इस संघर्ष विराम को बढ़ा दिया गया था और यह अब तक लागू है।

 

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