मध्यप्रदेश में नई पहल: टीचर अब डांस-ड्रामा के जरिए समझाएंगे कठिन विषय

 भोपाल 

सरकारी स्कूलों में अब अगर नृत्य-नाटक करते शिक्षक दिखें तो यह मत सोचिएगा कि वे पढ़ाई छोड़कर मस्ती कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्रदर्शन कलाओं के जरिए पढ़ाने की तैयारी चल रही है।

योजना है कि कठपुतली नृत्य, मुखौटा, मूर्तियों, कविता, गीत और चित्रों के जरिए गणित-विज्ञान के गूढ़ संदर्भों को समझाया जाए, ताकि कक्षा का वातावरण आनंददायक बना रहे और बच्चों को कठिन विषय आसानी से समझ आ जाए।

इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) समृद्धि-2025 में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रदेश के 30 जिलों के 65 शिक्षकों का चयन इसके लिए किया गया है। इनके बीच प्रतियोगिता भी कराई गई। ये शिक्षक अपने जिले में मुख्य प्रशिक्षक होंगे और अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।

हर विषय को कला से जोड़ने का प्रयास

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम के तहत उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एनसीईआरटी की ओर से प्रशिक्षक शिक्षकों का प्रशिक्षित कर रहे हैं। स्कूलों में इसकी अधिकारी निगरानी भी करेंगे, ताकि हर विषय को कला से जोड़ते हुए पढ़ाया जा सके।
इस विषय में ये गतिविधि

जीव विज्ञान – सांदीपनि विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने पाचन तंत्र के ऊपर नुक्कड़ नाटक तैयार किया है। इसमें उन्होंन 35 बच्चों को लिया था और उन्हें भोजन और एंजाइम बनाया था। इसमें कुछ बच्चों ने मिट्टी से पाचनतंत्र के माडल बनाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया था।

गणित – शासकीय नवीन कन्या उमावि की शिक्षिका प्रेरणा बर्डे ने गणित के कठिन प्रमेय और सूत्र को आकृति बनाकर समझाया। इसमें वह सालिड व प्लेन आकृति को थ्रीडी माडल से समझा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने त्रिशंकु व गोला को भी आकृति के माध्यम से पढ़ा रही हैं। साथ ही त्रिकोणमिति के कठिन सूत्र को भी आसान तरीके से कविता के माध्यम से बता रही हैं।
कठिन विषयों को पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा

    एनसीईआरटी का आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को गीत-संगीत व कला के माध्यम से कठिन विषयों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। – दिनेश शर्मा, नोडल अधिकारी, समृद्धि कार्यक्रम।

 

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