पर्यटन में नया आकर्षण: महेश्वर और कुक्षी में बनेंगे हैंडलूम-क्राफ्ट टूरिज्म विलेज, पर्यटक जान सकेंगे पारंपरिक कला

भोपाल
मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा चंदेरी के प्राणपुर की तर्ज पर महेश्वर के पास एक गांव को हैंडलूम टूरिज्म विलेज और कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। खरगोन जिले में स्थित महेश्वर का गांव केरिया खेड़ी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि धार जिले में स्थित कुक्षी बाग प्रिंट के लिए जाना जाता है।

चंदेरी साड़ी की बुनाई पर केंद्रित हैंडलूम टूरिज्म विलेज प्राणपुर की तरह ये दोनों नई परियोजनाएं पारंपरिक वस्त्र कला को बढ़ावा देंगी, पर्यटकों को आकर्षित करेंगी तथा बुनकरों और कारीगरों को खरीदारों से सीधे जुड़ने का एक मंच प्रदान करेंगी।

निफ्ट, एनआईडी और अन्य संस्थानों के छात्र और शोधकर्ता बुनाई और रंगाई प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन देख सकेंगे। दोनों परियोजनाओं को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। महेश्वर में कार्य जल्द शुरू होने वाला है। इसके बाद कुक्षी में परियोजना की शुरुआत होगी।
साड़ी बनते हुए देख सकेंगे पर्यटक

महेश्वर से लगभग चार किमी दूर छोटे से गांव केरिया खेड़ी में लगभग सौ परिवार माहेश्वरी साड़ियां, सलवार-सूट और अन्य वस्त्र बुनते हैं। यह गांव महेश्वर से ओंकारेश्वर जाने वाली सड़क से लगभग तीन किमी दूर स्थित है। गांव में एक कैफेटेरिया और एक अनुभव और विक्रय केंद्र बनाया जाएगा। गांव के नागरिक बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जाएगा।

परियोजना का क्रियान्वयन कर रहे अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्वीकृत और 5.11 करोड़ रुपये की लागत वाली महेश्वर परियोजना पर काम जल्द ही शुरू होगा और अगले साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है। केरिया खेड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से महेश्वर पर पर्यटकों का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।

मंदिर में दर्शन और नर्मदा नदी में डुबकी लगाने के लिए महेश्वर जाने वाले पर्यटकों का एक वर्ग हथकरघा गांव की ओर जा सकता है, क्योंकि गांव से लगभग दो किमी दूर नर्मदा नदी पर एक घाट है।वस्त्रों की रंगाई का प्रदर्शन होगा धार जिले के तहसील मुख्यालय कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा।

कुक्षी में लगभग 1500 बाग कारीगर रहते हैं। यहां भी कस्बे का कायाकल्प किया जाएगा और इसे एक ऐसे स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटक सीधे कारीगरों से बाग प्रिंट के वस्त्र खरीद सकेंगे। इस परियोजना का बजट 20.60 करोड़ रुपये है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा।

गांव डाई हाउस के अतिरिक्त कैफेटेरिया, विक्रय और अनुभव केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बोर्ड ने पहली बार चंदेरी के प्राणपुर में इस अवधारण को आकार दिया और प्राणपुर को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से मिला।

इसी से प्रोत्साहन पाकर महेश्वर और कुक्षी में पर्यटन ग्राम विकसित किए जा रहा हैं। दोनों जगहों के लिए टेंडर हो गए हैं, जल्द ही कार्य शुरू होगा। – डॉ अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति