रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका AI को कर रहा है युद्ध के नए हथियार में तब्दील

नई दिल्ली

अमेरिका अब साइबर वॉर को पूरी तरह बदलने जा रहा है। वह AI एजेंट्स बना रहा है जो दुश्मनों के नेटवर्क में अपने आप घुसकर हमला करेंगे। इस साल सरकार ने एक गुप्त स्टार्टअप पर लाखों डॉलर खर्च किए हैं। यह कंपनी दुश्मन देशों पर एक साथ सैकड़ों हमले करने की क्षमता विकसित कर रही है। यह तकनीक इतनी तेज है कि हफ्तों का काम कुछ मिनटों में हो जाएगा। वर्जीनिया की एक छोटी कंपनी है ट्वेंटी। इसे XX भी कहते हैं। US साइबर कमांड ने इसे 12.6 मिलियन डॉलर तक का कॉन्ट्रैक्ट दिया। नेवी से भी 240,000 डॉलर का रिसर्च कॉन्ट्रैक्ट मिला।

कंपनी में काम करने वालों का बैकग्राउंड क्या?
कंपनी की वेबसाइट कहती है कि वह पुराने काम को आसान बनाएगी। हफ्तों का मैनुअल काम अब ऑटोमेटिक हो जाएगा। सैकड़ों टारगेट पर एक साथ ऑपरेशन चलेगा। यह अमेरिका और उसके दोस्तों के साइबर युद्ध को बदल देगा। ट्वेंटी की टीम में सबके पास सैन्य या खुफिया एजेंसियों का अनुभव है। CEO जो लिन अमेरिकी नेवी रिजर्व में रहे हैं। वह पालो आल्टो नेटवर्क्स में प्रोडक्ट हेड थे। वहां उन्होंने सरकारी ग्राहकों को नेटवर्क की कमजोरियां बताईं। CTO लियो ओल्सन अमेरिकी आर्मी में सिग्नल इंटेलिजेंस ऑफिसर थे। वाइस प्रेसीडेंट इंजीनियरिंग स्काइलर ओनकेन ने साइबर कमांड और आर्मी में 10 साल से ज्यादा काम किया। गवर्नमेंट रिलेशंस हेड एडम हॉवर्ड हाल ही में ट्रंप प्रशासन की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ट्रांजिशन टीम में थे।

AI के क्षेत्र में क्या करती है यह कंपनी?
फोर्ब्स की रिपोर्ट बताती है कि यह तो स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आया है कि ट्वेंटी कंपनी क्या कर रही है। लेकिन इसके इसके नौकरी के विज्ञापनों से साफ हो गया कि वह क्या बना रही है। 'ऑफेंसिव साइबर रिसर्च का डायरेक्टर' की पोस्ट पर बैठा शख्स साइबर हमले के नए रास्ते ढूंढेगा, AI से चलने वाले ऑटोमेशन टूल्स बनाएगा। 'AI इंजीनियर' के तौर पर काम करने वाले कर्मचारी क्रू AI जैसे ओपन सोर्स टूल्स इस्तेमाल करेंगे। ये टूल्स कई AI एजेंट्स को एक साथ काम करने देते हैं। 'एनालिस्ट' की नौकरी के लिए ‘पर्सोना डेवलपमेंट’ का जिक्र है। यानी फेक ऑनलाइन अकाउंट बनाना, जो दुश्मन के खेमे में घुसकर जानकारी चुराए या हमला करे। यह तकनीक सोशल इंजीनियरिंग पर बेस्ड है।

क्या नामी AI कंपनियों का इस्तेमाल भी कर रहा अमेरिका?
रिपोर्ट में यह भी दावा है कि संभव है कि अमेरिका OpenAI, एंथ्रोपिक या एलन मस्क की xAI का भी इस्तेमाल कर रहा हो। रक्षा मंत्रालय ने इन तीनों को 200 मिलियन डॉलर तक के कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। यह ‘फ्रंटियर AI’ प्रोजेक्ट के लिए है। लेकिन कोई कंपनी नहीं बता रही कि वह क्या बना रही है। ट्वेंटी का फायदा यह है कि वह एक साथ सैकड़ों टारगेट पर हमला करने की तकनीक बना रही है। यह पुरानी तकनीकों से कहीं आगे है।

रक्षा के क्षेत्र में AI का इस्तेमाल हो रहा
AI का इस्तेमाल अभी ज्यादातर रक्षा में होता है। इस हफ्ते फोर्ब्स ने बताया कि इजरायली स्टार्टअप टेंजाई OpenAI और एंथ्रोपिक के मॉडल को बदलकर सॉफ्टवेयर में कमजोरियां ढूंढ रही है। लेकिन उसका मकसद हैकिंग नहीं, बल्कि सुरक्षा जांच है। यानी AI अभी बचाव में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन ट्वेंटी जैसी कंपनियां इसे हमले का हथियार बना रही हैं।

अमेरिका बनाम चीन
अमेरिका चुपके से AI को साइबर युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बना रहा है। ट्वेंटी जैसी कंपनियां इसे तेज, सस्ता और बड़े पैमाने पर करने जा रही हैं। चीन भी पीछे नहीं है। आने वाले सालों में साइबर हमले इंसानों से नहीं, AI एजेंट्स से होंगे।

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