आरक्षण सीमा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नसीहत, 50% से ऊपर नहीं होने की दी चेतावनी

नई दिल्ली

आरक्षण से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को चुनाव पर रोक तक लगाने की चेतावनी दे दी है। अदालत ने सोमवार को साफ कर दिया है कि स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा की अनुमति नहीं दी जाएगी। खास बात है कि अदालत की तरफ से चेतावनी ऐसे समय पर आई है, जब निकाय चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच मंगलवार से शुरू हो रही है। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाला बगची की बेंच सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट में क्या कहा गया

सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि कुछ निकाय ऐसे हैं, जहां OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए 27 आरक्षण ने 50 फीसदी की सीमा पार कर दी है। ऐसे में यह सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 6 मई को जारी आदेश का उल्लंघन है। सिंह ने कहा कि आदेश में चुनाव आयोग को जुलाई 2022 में आई बांठिया आयोग की रिपोर्ट से पहले के ओबीसी निर्देशों का पालन करने के आदेश दिए गए थे।

एडवोकेट सिंह सिंह और नरेंद्र हुड्डा ने दावा किया कि 40 प्रतिशत से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह लगभग 70 प्रतिशत है।
क्या बोला कोर्ट

बेंच ने कहा कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव 2022 की जे के बांठिया आयोग की रिपोर्ट से पहले की स्थिति के अनुसार ही कराए जा सकते हैं, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की गई थी।

शीर्ष न्यायालय का कहना है कि अब जब बांठिया आयोग की सिफारिशों को राज्य सरकार ने पूरी तरह लागू नहीं किया है, तो स्थानीय निकाय के चुनाव जुलाई 2010 से पहले लागू क्षेत्रों में ओबीसी आरक्षण के हिसाब से होंगे। महाराष्ट्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर पीठ ने मामले की सुनवाई 19 नवंबर के लिए तय की, लेकिन राज्य सरकार से कहा कि वह 50 प्रतिशत की सीमा से आगे न बढ़े।

शीर्ष अदालत ने कहा, 'अगर दलील यह है कि नामांकन शुरू हो गया है और अदालत को अपना काम रोक देना चाहिए, तो हम चुनाव पर रोक लगा देंगे। इस अदालत की शक्तियों का इम्तिहान न लें।'

पीठ ने कहा, “हमारा संविधान पीठ द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को पार करने का कभी इरादा नहीं था। हम दो न्यायाधीशों वाली पीठ में बैठकर ऐसा नहीं कर सकते। बांठिया आयोग की रिपोर्ट अब भी न्यायालय में विचाराधीन है, हमने पहले की स्थिति के अनुसार चुनाव कराने की अनुमति दी थी।”

शीर्ष अदालत ने उन याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

महाराष्ट्र में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए चुनाव दो दिसंबर को होंगे, जबकि मतगणना तीन दिसंबर को होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 नवंबर थी और 18 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 21 नवंबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे, जबकि चुनाव चिह्न और उम्मीदवारों की सूची 26 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

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