ग्लोबल रिपोर्ट: सड़क दुर्घटनाएँ हर वर्ष 11.90 लाख जानें लेती हैं

नई दिल्ली
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ने प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों के सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस वैश्विक समस्या से निपटने के लिए दुनिया को एकजुट होने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के यातायात प्रबंधन एवं सड़क सुरक्षा केंद्र में हर वर्ष नवंबर के तीसरे रविवार को सड़क दुर्घटनाओं में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए विश्व सड़क यातायात पीड़ित स्मृति दिवस का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी स्कूल ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एंड स्मार्ट पुलिसिंग के अंतर्गत यातायात प्रबंधन एवं सड़क सुरक्षा केंद्र ने गुजरात परिसर में एक कैंडल मार्च का आयोजन किया। इस वर्ष सभा को समन्वयक विश्व विजय राय ने संबोधित किया।

इस अवसर पर उल्लेख किया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट' 2023 के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 11 लाख 90 हजार लोग सड़क दुर्घटनाओं के कारण मरते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार देश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर वर्ष लगभग एक लाख 70 हजार लोगों की मौत होती है। 

बढ़ सकती है सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या, 2023 का आंकड़ा पार होने की आशंका

 साल 2024 में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा 2023 से भी ज्यादा हो सकता है। अब तक मिले शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, देश के दो दर्जन से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना, असम और दिल्ली में सड़क हादसों में हुई मौतें पिछले साल के मुकाबले बढ़ी हैं।

मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक (जिसमें पश्चिम बंगाल शामिल नहीं है), 2024 में सड़क हादसों में करीब 1.7 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। तुलना करें तो 2023 में यह संख्या 1.73 लाख थी, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। पश्चिम बंगाल में अकेले 6,000 से अधिक मौतें दर्ज की गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि जब बंगाल के आंकड़े जोड़ लिए जाएंगे, तो यह संख्या 2023 से ज्यादा हो जाएगी।

कुछ राज्यों में राहत की झलक
हालांकि, हर तरफ निराशाजनक तस्वीर नहीं है। 2024 के शुरुआती आंकड़ों में 9 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां सड़क हादसों में मौतों की संख्या कम हुई है। उदाहरण के तौर पर, केरल में 2023 में 4,080 मौतें हुई थीं, जबकि 2024 में यह घटकर 3,846 रह गईं। इसी तरह गुजरात में भी मौतों का आंकड़ा 7,854 से घटकर 7,717 हो गया।

विशेषज्ञों की राय: "10 बड़े राज्यों पर फोकस जरूरी"
ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक देश के 10 बड़े राज्य, जो कुल मौतों में सबसे ज्यादा हिस्सा रखते हैं, अपने आंकड़े नहीं घटाते, तब तक सड़क मौतों को आधा करने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है।

पूर्व सड़क परिवहन सचिव के मुताबिक, "राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों पर हादसे और मौतें कुल मामलों के लगभग 60 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। इन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।"

हादसों के आंकड़े और हकीकत में फर्क
आधिकारिक आंकड़े पूरी सच्चाई नहीं बताते, क्योंकि कई छोटे हादसे पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होते। फिर भी प्रारंभिक डेटा से पता चलता है कि 2024 में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4.7 लाख से अधिक सड़क हादसे हुए, जबकि 2023 में यह संख्या करीब 4.8 लाख थी।

सड़क सुरक्षा के लिए सरकार की नई योजना
सरकार अब सड़क सुरक्षा को और सख्ती से लागू करने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव करने जा रहा है। प्रस्ताव है कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के नियम और सख्त किए जाएं, और खराब ड्राइविंग व्यवहार पर नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लागू हो, जिससे चालकों का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द भी किया जा सके। 

सड़क सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती
सरकारी कोशिशों के बावजूद बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। अगर आने वाले समय में सड़क सुरक्षा पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सड़क पर जान गंवाने वालों की संख्या कम होती नहीं दिख रही। 

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