क्यों छीना जा सकता है अल फलाह यूनिवर्सिटी का माइनॉरिटी दर्जा? जानिए किसने थमाया नोटिस

नई दिल्ली 
दिल्ली ब्लास्ट के बाद से जांच में केंद्र में रही अल फलाह यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी स्टेटस पर भी अब खतरे के बादल उमड़ आए हैं। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के 'अल्पसंख्यक दर्जे' को लेकर एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इससे पहले, 12 नवंबर को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने भी मान्यता से जुड़े दावों को लेकर कॉलेज को नोटिस जारी किया था।
 
नोटिस का कारण NCMEI ने यूनिवर्सिटी से पूछा है कि उनका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए। यह कदम तब उठाया गया है जब जांचकर्ताओं ने 10 नवंबर को लाल किले में हुए धमाके में शामिल दो व्यक्तियों का संबंध इस संस्थान से पाया है। आयोग ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और हरियाणा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई के लिए बुलाया है। नोटिस में अल-फलाह से उनकी मैनेजिंग बॉडी, ट्रस्ट के ढांचे, फंडिंग (पैसे) के स्रोतों, नियुक्ति की प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग अधिनियम, 2004 के नियमों के पालन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं।

आयोग ने ट्रस्ट डीड, मैनेजमेंट की संरचना, एडमिशन के आंकड़े, शिक्षकों की नियुक्तियां, गवर्निंग बॉडी की बैठकों के विवरण और पिछले तीन सालों के वित्तीय विवरण के मूल रिकॉर्ड भी मांगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, "पेश न होने या दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर संस्थान के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की जा सकती है।"

इस बीच हरियाणा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह एक सत्यापन रिपोर्ट (verification report) दाखिल करे। इस रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान की मान्यता मिलने के बाद से किए गए निरीक्षणों (inspections), निगरानी कार्यों और विभाग व यूनिवर्सिटी के बीच हुए पत्राचार (बातचीत) का पूरा विवरण होना चाहिए। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, NCMEI अब निम्नलिखित बातों की जांच करेगा। क्या यूनिवर्सिटी का संचालन अभी भी उसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किया जा रहा है जिसका ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व है? क्या यूनिवर्सिटी के स्वामित्व या नियंत्रण में कोई बदलाव आया है? क्या अल्पसंख्यक दर्जे के लिए जरूरी शर्तें अभी भी बरकरार हैं?

10 नवंबर को हुए धमाके के बाद से इस संस्थान पर जांच और सख्त हो गई है। उस धमाके में कम से कम 12 लोगों की जान गई थी। जांच में पाया गया है कि विस्फोटकों से भरी गाड़ी चलाने वाले डॉ. उमर उन-नबी और इस मामले में आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनी, दोनों ही इस यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे।राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मामले से जुड़े चार डॉक्टरों का नाम अपने मेडिकल रजिस्टर से हटा दिया है। इन डॉक्टरों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

डॉक्टरों के नाम:
मुजफ्फर अहमद राथर
अदील अहमद राथर
मुजम्मिल शकील गनी
शाहीन शाहिद

18 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) की जांच के तहत हुई है, जो मान्यता (accreditation) के फर्जी दावों और पैसों की गड़बड़ी से जुड़ी है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने इस यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है। इससे पहले राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर किए गए मान्यता से जुड़े दावों पर सफाई मांगी थी। NAAC के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने अपना जवाब भेज दिया है। उन्होंने परिषद को बताया है कि वेबसाइट से वे दावे हटा दिए गए हैं। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद, अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के प्रशासन और कुलपति (Vice-Chancellor) ने इस मामले पर हिंदुस्तान टाइम्स (HT) के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

NCMEI की 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आयोग और दस्तावेज मांगेगा, नई जांच शुरू करेगा, या फिर संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे (minority status) की समीक्षा करके उसे वापस लेगा। फिलहाल कई एजेंसियां अल-फलाह ग्रुप के रोजगार रिकॉर्ड, वित्तीय डेटा और संस्थान द्वारा किए गए अन्य दावों की जांच कर रही हैं।

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