ऑनलाइन आतंक का नेटवर्क बेनकाब: टेरर मॉड्यूल के मास्टरमाइंड की पहचान उजागर

नई दिल्ली 
दिल्ली में लाल किला के पास हुए विस्फोट की जांच में सामने आए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में शामिल डॉक्टरों का कट्टरपंथ की ओर झुकाव साल 2019 से ही हो गया था। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का योगदान रहा। जांच से यह भी पता चला है कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से अपनी गतिविधियां चला रहे थे। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में अक्सर इनके नाम सामने आते हैं।

जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अब तक की जांच से सीमा पार आतंकवाद की रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं। ये भारत के लिए काफी चिंताजनक हैं। इस बदली रणनीति के तहत पाकिस्तान और दुनिया के अन्य हिस्सों में बैठे आतंकी आका डिजिटल प्लेटफार्मों का सहारा लेकर उच्च शिक्षित पेशेवरों को आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार कर रहे हैं।

सीमा पार बैठ ऐसे चुने मोहरे
जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि टेरर मॉड्यूल के सदस्यों को शुरू में सीमा पार के आतंकी आकाओं ने फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर एक्टिव पाया। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राठेर, डॉ. मुजफ्फर राठेर और डॉ. उमर उन नबी की गतिविधियों को देखकर ही उनका सलेक्शन सीमा पार के आतंकियों ने डिजिटल माध्यमों के जरिए किया।

आईईडी बनाने के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे भारत विरोधी लोगों को तुरंत ‘टेलीग्राम’ पर एक निजी ग्रुप में जोड़ा गया। यहीं से उन्हें बरगलाना शुरू किया गया। जांच में यह भी पाया गया है कि आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने हमलों को अंजाम देने के लिए संवर्धित विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बनाने का तरीका सीखने के लिए यूट्यूब का भी खूब इस्तेमाल किया।

सीमा पार के 3 आतंकी आकाओं के नाम
पूछताछ से मिले निष्कर्षों और डिजिटल फुटप्रिंट की छानबीन से पता चला कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी नाम के आतंकी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से बैठकर अपनी गतिविधियां चला रहे है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़ी जानकारियों में अक्सर इन्हीं आतंकी आकाओं के नाम सामने आते हैं।

 

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