राजधानी जयपुर में बदलाव की शुरुआत: नई ई-बसें, ट्रैफिक सुधार, ई-रिक्शा QR कोड और मेट्रो विस्तार

 जयपुर
 राजधानी जयपुर शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुधारने के लिए चार बड़े काम होने वाले हैं. इनका काम अब तेजी से आगे बढ़ने वाला है. इनमें सबसे पहला काम है जयपुर शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को स्मूथ करने के लिए जल्द ही 500 से 750 ई-बसें मिलने वाली है. दूसरा जयपुर के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए उत्तरी रिंग रोड़ के लिए भूमि अधिग्रहण का काम अब शुरू हो जाएगा. इसके लिए केन्द्र सरकार की मंजूरी मिल गई है. तीसरा जयपुर के ट्रैफिक के लिए आफत बन चुके ई-रिक्शा पर अब अंकुश लगाया जाएगा. इनकी संख्या सीमित कर इनके संचालन के लिए क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया जाएगा. चौथा जयपुर मेट्रो ट्रेन को विस्तार दिया जाएगा.

नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि मार्च 2026 तक जयपुर की सड़कों पर 500 से 750 ई-बसें दौड़ने लगेंगी. इन ई-बसों की आपूर्ति भारत सरकार से होनी है. उन्होंने हाल ही में दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के दौरान अपनी यह मांग केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री के सामने रखी थी. मंत्री ने बताया कि बसों के लिए से कार्यादेश जारी हो चुका है.

मार्च 2026 तक जयपुर को 500 से 750 ई-बसें मिल जाएंगी.

ट्रैफिक का दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी
ई-बस निर्माण यूनिट्स की क्षमता कम होने के कारण उत्पादन में देरी हो रही है. इसी वजह से अब उम्मीद है कि मार्च 2026 तक जयपुर को 500 से 750 ई-बसें मिल सकेंगी. इसके साथ ही शहर में जयपुर मेट्रो का तीन गुना विस्तार किया जाएगा. सरकार का दावा है कि मेट्रो विस्तार और नई ई-बसों के आने से जयपुर का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और बेहतर होगा. इससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी.

उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा
वहीं राजधानी जयपुर में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. जयपुर की उत्तरी रिंग रोड परियोजना के लिए केंद्र सरकार से भूमि अधिग्रहण की मंजूरी मिल गई है. इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इससे इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है. उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा. यह जयपुर जिले के उत्तरी हिस्से में व्यापक संपर्क मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही चौमूं, आमेर, जमवारामगढ़ और बस्सी समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे और अधिग्रहण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा. अधिकारियों के अनुसार भूमि अधिग्रहण पूरा होते ही निर्माण कार्य भी जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा.

उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा.

राजधानी में आने-जाने वाले भारी वाहनों का दबाव कम होगा
इस परियोजना को जयपुर जिले की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा योजनाओं में से एक माना जा रहा है. इसका निर्माण शहर की दीर्घकालिक यातायात समस्याओं को हल करने में अहम भूमिका निभाएगा. उत्तरी रिंग रोड तैयार होने के बाद राजधानी में आने-जाने वाले भारी वाहनों का दबाव शहर के बीचों-बीच न होकर बाहरी मार्ग से होगा. इससे शहर के ट्रैफिक भार में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है. इसके साथ ही क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. उससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी. इससे पहले जयपुर का दक्षिण रिंग रोड संचालन में है. वह अजमेर रोड से टोंक रोड होते हुए आगरा रोड को जोड़ता है. उत्तरी रिंग रोड के बन जाने के बाद जयपुर के चारों ओर एक पूर्ण रिंग संरचना तैयार हो जाएगी जिससे शहर का आवागमन और भी सुगम तथा व्यवस्थित होगा.

जब्त किए गए वाहनों के लिए अस्थायी पार्किंग विकसित की जाएगी
इससे पहले बीते दिनों जयपुर विकास प्राधिकरण में ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड (टीसीबी) की बैठक आयोजित हुई थी. उसमें शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे. इसमें तय किया गया कि शहर में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे ई-रिक्शा पर रोक लगाने और उनके सुचारू संचालन के लिए क्यूआर कोड प्रणाली लागू की जाएगी. बैठक में यातायात पुलिस की ओर से जब्त किए जाने वाले वाहनों के लिए 22 गोदाम पुलिया, बगराना, जलमहल-कनक घाटी और न्यू ट्रांसपोर्ट नगर के पास अस्थायी पार्किंग विकसित करने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा जेसीटीएसएल बस चालकों को नियमित यातायात प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे निर्धारित बस स्टॉप पर ही बस रोकें और यातायात नियमों का पालन करें.

जयपुर शहर में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे ई-रिक्शा पर रोक लगाने और उनके सुचारू संचालन के लिए क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया जाएगा.

150 नए बस शेल्टरों के लिए होगा सर्वे
यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से किए गए सर्वे के अनुसार शहर की 77 क्षतिग्रस्त सड़कों में से 52 का मरम्मतीकरण पूरा हो चुका है जबकि 14 पर कार्य जारी है. दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट) को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं. शहर में अवैध कटों को बंद करने, मुख्य मार्गों पर होटल-ढाबों के अतिक्रमण हटाने और नई पार्किंग विकसित करने सहित 150 नए बस शेल्टरों के लिए संयुक्त सर्वे कराने का निर्णय लिया गया. इसके साथ ही 45 ट्रैफिक पॉइंट पर 130 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी. भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण के लिए हाइट बार लगाने और स्मार्ट सिटी ऐप के जरिए पार्किंग की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. इस बैठक में जेडीए, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग, जेसीटीएसएल, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, नगर निगम और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे थे.

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