BJP का पाकिस्तान पर हमला: राम मंदिर मुद्दे पर बयान को बताया दोहरापन, दिलाया ओसामा की याद

अयोध्या 
अयोध्या में भव्य तरीके से किए गए राम मंदिर ध्वज रोहण कार्यक्रम को लेकर पाकिस्तान ने एक बयान जारी किया था। उसके इस बयान को लेकर विदेश मंत्रालय पहले ही उसकी आलोचना कर चुका है। अब भारतीय जनता पार्टी ने भी पाकिस्तान को उसके गिरेबान में झांकने का संकेत देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर पाकिस्तान का बोलना ऐसा है मानो 'ओसामा बिन लादेन दुनिया को शांति का संदेश दे रहा हो।'
 
भारतीय जनता पार्टी की तरफ से राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मोर्चा संभालते हुए पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान जैसे देश को किसी को अल्पसंख्यकों और मानवाधिकारों पर भाषण नहीं देना चाहिए। वह जरा अपने रिकॉर्ड पर नजर डालें… सबसे मजेदार बात यह है कि वह यह सब 26/11 के दिन कह रहे हैं। ठीक उसी दिन जब उन्होंने सबसे घृणित आतंकवादी हमला किया था, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।" अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पूनावाला ने कहा, "पाकिस्तान में आईएसआई और आर्मी का ढांचा कई समुदायों को प्रताड़ित करता है। इसलिए उन्हें दूसरे देशों को इस मामले में भाषण देने का कोई हक नहीं है।"

क्या कहा था पाकिस्तान ने?
अयोध्या में राम मंदिर के ऊपर पीएम मोदी के ध्वजारोहण करने के बाद पाकिस्तान की तरफ से एक बयान जारी किया गया था। इस बयान अयोध्या में हुए इस आयोजन को मुस्लिम विरासत को मिटाने का प्रयास और भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर दबाव का संकेत बताया था।

विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब
इस्लामाबाद की तरफ से जारी इस बयान पर विदेश मंत्रालय ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सीधे शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को दूसरों को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, "हमने पाकिस्तान की टिप्पणियों को देखा है और हम उन्हें पूरी तरह से खारिज करते हैं। एक ऐसा देश जिसका इतिहास कट्टरता, दमन और अपने ही अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से भरा हुआ हो, उसे दूसरों को नैतिक ज्ञान नहीं देना चाहिए। पखांडी बयान देने की बजाय पाकिस्तान को अपने अंदर झांकना चाहिए और अपने देश के मानवाधिकार रिकॉर्ड को देखना चाहिए।"

इससे पहले भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पाकिस्तान के साथ-साथ विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "भारत में इस्लामाफोबिया और हिंदुत्व पाकिस्तान की एक अलग राय है। लेकिन एक बात हमेशा हैरान करती है कि यह राय विपक्ष से मेल कैसे खाती है। खासतौर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस से.. यह दोनों की भाषा मेल खाती है।

 

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