प्रदेश में उत्तम शिक्षा एवं कौशल विकास के केन्द्र बन रहे हैं सांदीपनि विद्यालय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गुणवत्ता शिक्षा में सांदीपनि विद्यालय को मिल रही है अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
अगले शैक्षणिक सत्र तक 250 से अधिक विद्यालयों के होंगे अपने भवन

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति वर्ष 2020 के अनुरूप स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिये राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों ने अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिये जाने के साथ ही उनके कौशल विकास और उन्हें रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य में सांदीपनि विद्यालय की शुरूआत वर्ष 2022-23 शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हुई। इस सत्र में प्रथम चरण में प्रदेश में 274 सांदीपनि विद्यालय शुरू किये गये। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 3 लाख से ऊपर हो गयी है। विद्यालय में केजी-वन से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। वर्ष 2024-25 में कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 88 प्रतिशत और कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 84 प्रतिशत तक रहा है।

उत्कृष्ट अधोसंरचना
स्कूल शिक्षा विभाग ने सांदीपनि विद्यालयों में अधोसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता दी है। राज्य में 256 सांदीपनि विद्यालय भवनों के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया। विद्यालयों के भवन निर्माण एवं संसाधनों की सुविधा के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने लगभग 10 हजार करोड़ रूपये की कार्ययोजना तैयार की है। अब तक 44 सांदीपनि विद्यालयों के नवीन भवन बनकर तैयार हो गये हैं। इन नवीन भवनों में सांदीपनि विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। अगले शैक्षणिक सत्र वर्ष 2026-27 में 256 विद्यालयों का भवन निर्माण पूरा कर लिया जायेगा। सांदीपनि विद्यालयों में निकटस्थ 10 से 15 किलोमीटर दूरी के विद्यार्थियों को लाने के लिये नि:शुल्क परिवहन सेवा भी प्रदान की जा रही है।

पूर्णत: सुसज्जित प्रयोगशालाएं
प्रदेश में संचालित सभी सांदीपनि विद्यालयों में पूर्णत: सुसज्जित प्रयोगशालाएं, कम्प्यूटर लेब, आर्ट एण्ड क्राफ्ट रूम, म्यूजिक रूम, आधुनिक लाइब्रेरी और खेल मैदान के साथ ऑडिटोरियम की सुविधा भी दी गई है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार
सांदीपनि विद्यालयों ने अपने कुशल संचालन से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त किये हैं। वर्ष 2024 में सांदीपनि बिनोवा विद्यालय रतलाम ने नवाचार श्रेणी में अंतर्राष्ट्रीय संस्था टी-4 एजुकेशन का प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। विद्यालय को पुरस्कार स्वरूप 10 हजार डॉलर राशि प्रदान की गई। इसी तरह सांदीपनि विद्यालय झाबुआ को सर्पोटिंग हेल्थी लाइफ श्रेणी में विश्व के प्रथम 10 विद्यालयों में चयनित किया जा चुका है। वर्ष 2025 में सांदीपनि विद्यालय मालव कन्या को फिक्की द्वारा एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया गया।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति