पौष मास 5 दिसंबर से आरंभ: इस महीने में विवाह रुक जाते हैं, क्या है धार्मिक कारण?

 

हिंदू कैलेंडर का दसवां महीना पौष है, जिसे पूस माह भी कहते हैं. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद यह महीना शुरू होता है और इसके बाद माघ माह शुरू हो जाता है. पंचांग के अनुसार, इस बार यह माह 5 दिसंबर 2025 से शुरू होने जा रहा है. फिर अगले साल 3 जनवरी 2025 को इसका समापन होगा. यह महीना वैसे तो धार्मिक और ज्योतिष की दृष्टि से खास है. लेकिन इसमें कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. आइए जानते हैं कि पौष मास में विवाह क्यों नहीं होता है.

पौष मास का महत्व
पौष मास को सूर्य देव का महीना कहा जाता है. इस महीने में सूर्य देव की उपासना करना विशेष महत्व है, जिससे ऊर्जा, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. साथ ही, पौष मास महीना पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए बहुत शुभ है. इस दौरान किए गए तर्पण से पितरों को संतुष्टि और शांति मिलती है, जिससे पितृ दोष दूर होता है. पौष माह में मध्य रात्रि की साधना तुरंत फलदायी मानी गई है.

पौष मास में शुभ कार्य क्यों नहीं होते हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष महीने में विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. इसका मुख्य कारण है सूर्य का धनु राशि में प्रवेश करना. सूर्य के धनु राशि में गोचर के कारण पौष मास अशुभ माना जाता है, जो खरमास कहलाता है. खरमास 1 महीने तक चलता है और इस दौरान सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन आदि नहीं किए जाते हैं. खरमास का समय देवताओं के लिए विश्राम काल भी माना जाता है.

पौष महीना अशुभ क्यों है?
सूर्य का प्रभाव कम: पौष महीने में सूर्य धनु राशि में होते हैं, जो ज्योतिष में अशुभ माना जाता है.

खरमास: सूर्य की इस स्थिति के कारण इस पूरे महीने को खरमास या मलमास कहा जाता है.

छोटे दिन और लंबी रातें: खरमास के दौरान सूर्य दक्षिणायन होते हैं, जिससे दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं.

मांगलिक कार्यों पर रोक: सूर्य के शुभ प्रभाव में कमी आने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक और शुभ कार्य इस महीने में करना वर्जित होता है.

पौष महीने में क्या करना शुभ है?

आध्यात्मिक कार्य: पौष महीने में पूजा-पाठ, हवन और आध्यात्मिक कार्यों को करना बहुत शुभ माना जाता है.

तीर्थ यात्रा: पौष के महीने में किसी तीर्थ स्थल की यात्रा करना भी बहुत फलदायी माना जाता है.

सूर्य की पूजा: इस महीने में रोज तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करना और सूर्य पूजा करना लाभकारी होता है.

दान-पुण्य: पौष महीने में दान-पुण्य और स्नान का विशेष महत्व माना गया है.

पौष मास में क्या नहीं करना चाहिए?

    पौष मास में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ जैसे शुभ कार्यों से बचना चाहिए.
    पौष में शराब, मांस और किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए.
    पौष के महीने में भारी और गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए.
    पौष मास में उड़द और मसूर की दाल, मूली, बैंगन, फूलगोभी और तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए.
    पौष के महीने में नमक का सेवन कम करना चाहिए या इससे बचना चाहिए.
    पौष मास में बहुत ज्यादा चीनी और तेल या घी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

 

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