मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: SIR प्रक्रिया अंतिम चरण में, लाखों नाम हो सकते हैं डिलीट

भोपाल
प्रदेश में मतदाताओं के गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन शत-प्रतिशत हो गया है। गुरुवार रात 12 बजे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो जाएगी। 16 दिसंबर को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा। इसमें प्रदेश भर के 30 से 35 लाख मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। इनमें मृत, स्थानांतरित, दो स्थान पर नाम वाले मतदाता शामिल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जिले के विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची से नाम अधिक कटने की संभावना है।
 
वहीं, जिनके गणना पत्रक तो जमा हो गए लेकिन आवश्यक जानकारी नहीं दी गई है, उन्हें रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस देकर दस्तावेज मांगे जाएंगे। एसआईआर में जो गणना पत्रक दिए गए, वे मतदाताओं को भरकर देने थे। इसमें वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता, दादा-दादी में से किसी एक के नाम की जानकारी भी देनी थी। जिन मतदाताओं ने वर्ष 2003 के एसआईआर के आधार पर जानकारी न देकर केवल हस्ताक्षर करके गणना पत्रक दिए हैं, उनके नाम तो प्रारूप सूची में आएंगे लेकिन उन्हें नोटिस जारी होंगे। ऐसे मतदाताओं की संख्या करीब 12 लाख है। चूंकि, गणना पत्रक सभी मतदाताओं को जारी किए गए हैं इसलिए जिन मतदाताओं ने एक से अधिक स्थान पर गणना पत्रक जमा किए हैं, उनके नाम केवल एक स्थान पर रहेंगे।
 
इंदौर में 1.94 लाख मतदाताओं का नहीं मिला 2003 का रिकॉर्ड, अब देने होंगे दस्तावेज
भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य शहरी क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम अधिक कटेंगे क्योंकि यहां अपेक्षाकृत अधिक मतदाता रोजगार, पढ़ाई आदि कारणों से स्थानांतरित होते रहते हैं। मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की अलग से सूची बनेगी। यह संख्या 18 से 23 लाख हो सकती है। इनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं आएंगे। प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि बूथ लेवल एजेंटों से जो जानकारी प्राप्त हो रही है, उसके अनुसार सूची में ऐसे मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में दर्ज हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर दर्शाए पते पर रहते ही नहीं हैं। ऐसे सभी मतदाताओं के नाम सूची से हटेंगे। प्रारूप प्रकाशन के बाद बूथवार मतदाताओं का सत्यापन कराया जाएगा। इसके आधार पर दावा-आपत्ति होंगे।

16 दिसंबर को होगा प्रारंभिक प्रकाशन
मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 16 दिसंबर को होगा। इसमें जो नाम शामिल नहीं होंगे, उन्हें विलोपित माना जाएगा। सूची के आधार पर 15 जनवरी, 2026 तक दावा-आपत्ति होंगे। सात फरवरी तक इनका निराकरण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी करेंगे। प्रारूप सूची में नाम नहीं आया तो भी अवसर यदि किसी भी कारण से प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं आता है तो भी नाम जुड़वाने का अवसर रहेगा। इसके लिए दावा या आपत्ति की प्रक्रिया में भाग लेना होगा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को निर्धारित पहचान पत्र बताने होंगे। इस आधार पर निर्णय होगा। एक नजर में 27 अक्टूबर, 2025 की स्थिति में मतदाता- 5,74,06,143 मतदान केंद्र- 65,014 गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन हुआ- 5,74,06,098

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