लश्कर के पहलगाम अटैक के बाद अमेरिका का सख्त संदेश: भारत से गठबंधन ही सुरक्षित रास्ता

वाशिंगटन 
अमेरिकी सांसद जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा को बता रहे हैं। खास बात है कि अमेरिकी पक्ष यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के बीच रिश्ते मजबूत होते नजर आ रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर वाइट हाउस गए थे।

हाउस फॉरेन अफेयर्स साउथ एंड सेंट्रल एशिया सबकमेटी के अध्यक्ष बिल हुइजेंगा ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता अब सिर्फ जरूरी नहीं रह गया है, बल्कि यह 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ऐसी दुनिया चाहता है, जहां लोकतंत्र से नियम बनें, तो भारत के साथ हमारी साझेदारी बेहद अहम है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा, 'पहलगाम में भयानक हमले के लिए जिम्मेदार LeT और TRF को ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2025 में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जो आतंकवादी के खिलाफ जंग में हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। फिर हमला कहीं भी क्यों न हुआ हो…।'

चीन का भी लिया नाम
हुइजेंगा ने कहा, 'चीन और रूस जैसी ताकतें बलपूर्वक सीमाएं बदल रही हैं और पड़ोसियों पर दबाव डाल रही हैं। यह इंडो-पैसेफिक से ज्यादा साफ कहीं नहीं देखा जा रहा है, जहां लगातार आक्रामक होता चीन क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक समृद्धि और व्यापार के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। …हम ऐसा नहीं होने दे सकते। भारत इन जोखिमों को पहले से जानता है।'

उन्होंने कहा, '2020 से भारत के साथ साझा सीमा में चीनी बलों ने भारतीय सैनिकों को मारा है। भारत ने भी मजबूती से जवाब दिया है, चीन के सैन्य दबाव को कमजोर किया है और भारत और पड़ोसी भूटान में चीनी प्रभाव को कम किया है। आज भारत और अमेरिका के बीच सहयोग में में रक्षा, तकनीक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और व्यापार शामिल हैं।'

ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल को आतंकवादी ने पहलगाम में 26 सैलनियों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल समझौता रोकने समेत कई फैसले लिए। इसके अलावा भारतीय सेना ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर का आगाज किया था, जिसके तहत पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच करीब 4 दिनों तक संघर्ष हुआ। पाकिस्तानी पक्ष के अनुरोध को बाद सीजफायर किया गया था।

 

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