कैंसर का बढ़ता खतरा: देश में 15 लाख से ज्यादा मरीज, यूपी बना हॉटस्पॉट, दिल्ली में AAI रेट हाई

नई दिल्ली 
भारत में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी तेजी से फैलती जा रही है और इसके फैलने की दर भी लगातार बढ़ ही रही है. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैंसर से पीड़ित मरीज हैं. एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या में 2 लाख का इजाफा हुआ है और यह अब 15 लाख से अधिक हो गई है.

राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद इंदु बाला गोस्वामी ने स्वास्थ्य मंत्रालय से देश में पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या और देशभर के सभी जिलों में डे केयर कैंसर सेंटर (DCCC) खोलने की योजना को लेकर सवाल पूछा, इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)- नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के अनुसार, पिछले 5 सालों में देश में सभी प्रकार के कैंसर के मामलों की अनुमानित घटना 15 लाख से अधिक हो गई है.

साल 2024 में कैंसर केस 15 लाख के पार
सरकार की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार, पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढी है. साल 2020 में देश में 13,92,179 कैंसर मरीज थे. 2021 में यह संख्या बढ़कर 14,26,447 हो गई. साल 2022 में कैंसर मरीजों की संख्या 14,61,427 तक पहुंच गई. 2023 में कैंसर मरीजों की 15 लाख के करीब हो गई और यह संख्या 14,96,972 थी. साल 2024 में कैंसर मरीजों की संख्या 15 लाख (15,33,055) पार कर गई.

साल दर साल बढ़ रहा कैंसर
साल 2020     1392179
साल 2021     1426447
साल 2022     1461427
साल 2023     1496972
साल 2024     1533055

संसद को दिए जवाब के अनुसार, कैंसर पीड़ितों की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में है. यहां पर 2024 में कैंसर पीड़ितों की अनुमानित संख्या 2 लाख (2,21,000) से अधिक है. महाराष्ट्र में 1,27,512, पश्चिम बंगाल में 1,18,910 और बिहार में 1,15,123 कैंसर मरीज हैं.

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक DCCC
एक अन्य सवाल के जवाब में केंद्र ने बताया कि बजट 2025-26 की घोषणा के अनुसार, सरकार अगले 3 सालों में जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों की सलाह से डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापना के लिए एक नेशनल गैप का अध्ययन किया है. इस मामले में सबसे अधिक पीड़ितों का सामना करने वाले जिलों को प्राथमिकता दी गई है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से अपने-अपने प्रस्ताव दिए जाने और संसाधनों को अनुकूलित करने तथा दोहराव से बचने के लिए नेशनल प्रोग्राम कोआर्डिनेशन कमिटी (NPCC) द्वारा अंतिम रूप दिया गया.

जवाब के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, पूरे देश में 297 DCCC स्थापित करने की मंजूरी दी गई है, जिसमें हिमाचल प्रदेश में अकेले 18 DCCC शामिल हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 68 केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है. तेलंगाना ने 27 और बिहार में 21 केंद्र स्थापित किए जाने हैं.

मुंबई-कोलकाता से अधिक दिल्ली में केस
दूसरी ओर, केंद्र ने संसद को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कैंसर के सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं. यहां उम्र के हिसाब से एडजस्टेड इंसिडेंस रेट (Age-Adjusted Incidence Rate, AAIR) पुरुषों के लिए 1 लाख पर 146.7 और महिलाओं के लिए 132.5 है, जो मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों से कहीं अधिक है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यसभा में दिल्ली और पंजाब में कैंसर के मामलों पर एक तारांकित सवाल के जवाब में बताया कि ये आंकड़े इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के तहत जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों पर आधारित हैं और तुलना के लिए वर्ल्ड स्टैंडर्ड पॉपुलेशन के हिसाब से एडजस्ट किए गए हैं.
 
दिल्ली के अलावा अन्य मेट्रो शहरों में, हैदराबाद में पुरुषों के लिए AAIR 114.7 और महिलाओं के लिए 153.8 रहा, इसी तरह बेंगलुरु में पुरुषों के लिए 127.7 और महिलाओं के लिए 151.3 दर्ज किया गया है. जबकि मुंबई में यह दर कहीं कम थी, यहां पुरुषों के लिए 108.9 और महिलाओं के लिए 114.2, और कोलकाता में यह दर क्रमशः 105.5 और 98.6 दर्ज की गई. पंजाब के पटियाला में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, AAIR पुरुषों के लिए 69.6 और महिलाओं के लिए 80.7 था, जो दिल्ली से बहुत कम है.

ब्रेस्ट कैंसर से जूझते दिल्ली और पंजाब
आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के सबसे ज़्यादा केस सामने आए, जो 2023 में 3,198 से बढ़कर 2025 में 3,321 हो गए. वहीं सर्वाइकल कैंसर के मामलों में थोड़ी कमी आई, 741 से घटकर यह संख्या 692 हो गई, जबकि फेफड़ों और मुंह के कैंसर के मामले धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. पंजाब में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे आम रहे, यहां अब 3,342 से बढ़कर 3,388 केस हो गए. यहां पर पुरुषों में मुंह और प्रोस्टेट कैंसर के केस ज्यादा थे, और 2025 तक प्रोस्टेट कैंसर के मामले अनुमानित 1,170 से ज़्यादा हो जाएंगे.

 

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