राजनीति के गलियारों में हलचल: यूपी विधानसभा में एक लिफ्ट में दिखे केशव मौर्य–शिवपाल यादव

लखनऊ 
यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन के बाहर एक दिलचस्प सियासी संयोग देखने को मिला। कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव एक ही लिफ्ट में साथ जाते नजर आए, जिसका वीडियो अब चर्चा का विषय बन गया है। इससे पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सोमवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को विधानसभा में वंदेमातरम् पर विशेष चर्चा के दौरान कहा कि हम एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से काम कर रहे हैं। वंदेमातरम् आजादी के आंदोलन का महामंत्र है। देश के दुश्मनों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक हो, एयर स्ट्राइक हो, आपरेशन सिंदूर हो, यही वंदेमातरम है। सपा सदस्यों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये जो विरोधी हैं, इनकी भी स्थिति एक ही गाड़ी में बैठकर जाने वाली हो जाएगी।

वंदेमातरम विकसित भारत-विकसित यूपी का मंत्र
विधानसभा में विशेष चर्चा में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह देश की आजादी के आंदोलन में भाग लेने वाले महान क्रांतिकारियों को नमन करते हैं। जिन्होंने फांसी के फंदे को चूम लिया, उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग भारत माता की जय बोलते हैं, आजम का नाम लिए बिना बोले की एक सदस्य क्या बोलते थे, जो आज जेल में हैं। वंदेमातरम् सन्यासी विद्रोह की आग है, वंदेमातरम् भारत की शास्वत चेतना है, अंग्रेजों की पराधीनता से भारत को मुक्ति दिलाने का महामंत्र रहा है। वंदेमातरम् विकसित भारत- विकसित उत्तर प्रदेश का मंत्र होने वाला है। वंदेमातरम् का मतलब है, भारतमाता की जय। नौजवानों के उज्जवल भविष्य के लिए, बिना भेदभाव सबका साथ- सबका विकास, हो रहा, यही वंदेमातरम् है।

वंदे मातरम केवल गीत नहीं स्वतंत्रता का जयघोष है: शिवपाल
वहीं सपा के वरिष्ठ विधायक शिवपाल यादव ने विधानसभा में संबोधन के दौरान वंदे मातरम् को लेकर कहा कि वह उस पवित्र उद्घोष को नमन करते हैं, जो केवल एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता का जयघोष है।

शिवपाल यादव ने कहा कि वंदे मातरम् को बंकिमचंद्र ने अपने उपन्यास आनंद मठ में स्थान दिया था। उस दौर में जब बोलना भी विद्रोह माना जाता था, तब यह गीत आज़ादी का मशाल बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि इस गीत में पूरे देश की आत्मा निहित है और इसे समग्र रूप से देखा जाना चाहिए। यदि वंदे मातरम् को किसी संप्रदाय विशेष के रूप में देखा जाएगा, तो यह उसकी महिमा का अपमान होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि कोई सच में वंदे मातरम को मानता है, तो उसे समाज में समान व्यवहार भी अपनाना चाहिए। शिवपाल यादव ने सदन में विभाजनकारी बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब तक विधानसभा में इस तरह की बातें होंगी, वह उनका विरोध करते रहेंगे।

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