मोबाइल विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी की अपील नामंजूर, तलाक पर लगी मुहर

जबलपुर 
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में एक आदमी को उसकी पत्नी से दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया।
 
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कथित व्यभिचार को दर्शाने वाली मोबाइल फोन की तस्वीरों के आधार पर दी गई तलाक को बरकरार रखा। कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत प्रमाण पत्र पर जोर नहीं दिया। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को सबूत के रूप में स्वीकार्यता से संबंधित है। किसी इलेक्ट्रानिक उपकरण से प्राप्त साक्ष्य को वैध माने जाने के लिए धारा 65बी का प्रमाण पत्र पेश करना जरूरी है।

हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल धागत और जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों पर सख्ती से लागू नहीं होता है क्योंकि फैमिली कोर्ट को किसी भी प्रकार का साक्ष्य स्वीकार करने की अनुमति है।

हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 के अनुसार, फैमिली कोर्ट किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज, सूचना या मामले को साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है, जो उसके विचार से किसी विवाद से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायक हो। चाहे वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत प्रासंगिक या स्वीकार्य हो या न हो।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम वैवाहिक मामलों में सख्ती से लागू नहीं होता है और कोर्ट को सत्य का पता लगाने के लिए किसी भी रिपोर्ट, बयान, दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने का अधिकार दिया गया है। अतः कोर्ट को उक्त तस्वीरों पर भरोसा करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में कोई गलती नहीं दिखती है।

तलाक के फैसले के खिलाफ अपील करने वाली पत्नी ने तर्क दिया था कि कथित तस्वीरें किसी दूसरे मोबाइल से ली गई थीं क्योंकि पति ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया था। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि पत्नी ने तस्वीरों में अपनी मौजूदगी से इनकार नहीं किया था, बल्कि सिर्फ इतना कहा था कि तस्वीरें फर्जी हैं।

कोर्ट ने कहा कि केवल इतना कहा गया है कि ये तस्वीरें किसी चालबाजी का उपयोग करके बनाई गई हैं। इन फर्जी तस्वीरों को किसने और कैसे बनाया है, इसका जिक्र नहीं किया गया है। इन तस्वीरों को लेकर टकराव से बचने के लिए केवल एक सामान्य बयान दिया गया है। पत्नी की इस दलील पर कि प्राथमिक उपकरण (पहला मोबाइल) उपलब्ध नहीं था, कोर्ट ने कहा कि पति ने तस्वीरों को अपने फोन में ट्रांसफर करने के बाद गुस्से में आकर उसे तोड़ दिया था।

कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर की गई थीं, जिसके बाद पति ने उसका मोबाइल तोड़ दिया। कोर्ट ने कहा कि पति का मोबाइल तोड़ना स्वाभाविक प्रतीत होता है। पति के मोबाइल फोन में पत्नी के व्यभिचार के सबूत थे। उसने वे तस्वीरें अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लीं। कोई भी आदमी अपनी पत्नी को व्यभिचार जारी रखते देखना पसंद नहीं करेगा। इसलिए पति ने गुस्से में आकर और पत्नी का प्रेमी से संपर्क तोड़ने के लिए उसका मोबाइल तोड़ दिया।

रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों, पत्नी की स्वीकारोक्ति और तस्वीरें तैयार करने वाले व्यक्ति के साक्ष्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पत्नी की अपील में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने पत्नी द्वारा दायर अपील खारिज कर दी।

 

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