कम उम्र, बड़ा साहस: 10 वर्षीय सरवन सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाई अहम भूमिका, मिला बाल पुरस्कार

नई दिल्ली 
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जवानों को सेवा देने वाले 10 साल के नन्हें सिपाही सरवन सिंह को शुक्रवार का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बाल पुरस्कार से सम्मानित किया है। पाकिस्तान के साथ तनाव और भयंकर गोलीबारी के बीच अपनी जान की परवाह किए बिना यह बच्चा अपने गांव के पास तैनात जवानों के लिए दूध, पानी और लस्सी पहुंचाता रहा। सरवन सिंह की इस हिम्मत और देशभक्ति को आज पूरा देश सलाम कर रहा है। सरवन सिंह ने खुद कहा कि यह उनका अपना ही फैसला था कि किसी भी कीमत पर जवानों के लिए दूध और लस्सी का इंतजाम करना है और उनतक पहुंचाना है।
 
सरवन सिंह ने कहा, जब मिशन ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ था और हमारे फौजी हमारी रक्षा के लिए आए थे। तब मैं दूध, लस्सी, चाय और बर्फ लेकर रोज जाता था। उन्होंने कहा कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह अवॉर्ड मुझे दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि 10 साल के बच्चे को उसके परिवारवालों ने भी नहीं कहा था कि वह इतने खतरनाक हालात में बाहर जाए।

कैन हैं सरवन सिंह?
कक्षा 4 में पढ़ने वाला बच्चा सरवन सिंह आज देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा बन गया है। वह फिरोजपुर जिले के ममडोट इलाके के तारा वली गांव के रहने वाले है। उनका गांव पाकिस्तान की सीमा से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है। मई में 7वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल कमांडिंग ऑफिसर मेजर जनरल रंजीत सिंह मनराल ने सरवन के बारे में पहली बार बताया था। उन्होंने बताया था कि एक 10 साल का बच्चा भी ऑपरेशन सिंदूर में जवानों का साथ दे रहा था। सरवन सिंह ने कहा, मैं भी बड़ा होकर फौजी बनना चाहता हूं और देश की सेवा करना चाहता हूं। सरवन सिंह के पिता भी उसकी इस निष्ठा से बेहद खुश हैं।

पंजाब में बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सरवन सिंह को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखाये गये अद्वितीय साहस के लिए राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किये जाने पर बधाई दी और कहा कि यह पंजाब के लिए गौरव का क्षण है। जाखड़ ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखाये गये अद्वितीय साहस के लिए पंजाब के 10 वर्षीय सरवन सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया गया।" यह पंजाब के लिए अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने कहा," मैं बच्चे को शुभकामनाएं देता हूं, और उसके देशभक्ति के जज़्बे को सलाम करता हूं। "

 

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