नए साल से पहले भूपेश बघेल ने अमरकंटक में मां नर्मदा का लिया आशीर्वाद

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साल के अंतिन दिन अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा की पूजा अर्चना किया. बीती शाम को वो जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के दौरे पर थे. जहां वो कांग्रेस जिलाअध्यक्ष के शपथ ग्रहण में हुए थे.

बता दें कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए मां नर्मदा से प्रदेश की खुशहाली की कामना किया है. उन्होंने अपने पोस्ट को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा- त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे अमरकंटक में अपने निर्मल जल से कंकर-कंकर को भी शंकर बनाने वाली जीवनदायिनी मां नर्मदा के पवित्र दर्शन कर, बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख और समृद्धि की कामना की.

इस दौरान कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, जिला कांग्रेस कमेटी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही अध्यक्ष गजमती भानु भी सीएम के साथ मौजूद थे.

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति