पश्चिम बंगाल पर अमित शाह की नजर, असंतुष्ट दिलीप घोष से मुलाकात कर साधा सियासी संतुलन

कोलकाता 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का वक्त बाकी है, लेकिन भाजपा अभी से ऐक्टिव हो गई है। यहां तक कि ज्यादातर बड़े राज्यों में चुनाव की कमान संभालने वाले होम मिनिस्टर अमित शाह ने खुद यहां संभाल लिया है। 2021 में 2 मई को बंगाल चुनाव के नतीजे आए थे और इस बार भी अप्रैल में ही मतदान कराए जा सकते हैं। इस बीच बुधवार को अमित शाह ने कोलकाता में तमाम भाजपा नेताओं के साथ बैठक की। यह मीटिंग कोलकाता के साल्ट लेक होटल में हुई। इसमें नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य मौजूद थे। इसके अलावा तमाम दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही।

इस मीटिंग में दिलीप घोष की मौजदूगी ने सभी को चौंकाया। उनसे खुद अमित शाह ने मुलाकात की और कई मुद्दों पर बात की है। उनकी मौजूदगी इसलिए चर्चाएं बटोर रही है क्योंकि कुछ समय पहले तक ऐसी चर्चाएं रही हैं कि वह भाजपा से नाराज चल रहे हैं। वह ममता बनर्जी के साथ एक कार्यक्रम में भी नजर आए थे, जब सीएम भगवान जन्नाथ के एक मंदिर का लोकार्पण करने पहुंची थीं। चर्चा यहां तक थी कि वह टीएमसी में जा सकते हैं। लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। भाजपा की कोशिश है कि दिलीप घोष को साध लिया जाए। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अहम भूमिका देकर फ्रंट पर लाया जा सकता है।

इस बैठक में बंगाल के सभी पार्टी सांसदों, विधायकों को बुलाया गया था। यही नहीं कई नगर निगमों के नेता भी मौके पर थे। संगठन के भी कुछ प्रभावशाली लोगों को इसका न्योता दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि इस मीटिंग में ज्यादातर उन नेताओं को ही बुलाया गया, जिन्हें विधानसभा इलेक्शन का टिकट मिल सकता है। इसके अलावा कुछ ऐसे सीनियर नेता भी बुलाए गए, जिन्हें चुनाव में प्रचार की जिम्मेदारी मिल सकती है। दरअसल दिलीप घोष का यहां पहुंचना कई नेताओं को हैरान करने वाला रहा। उन्हें बंगाल भाजपा के सबसे कामयाब प्रदेश अध्यक्षों में शुमार किया जाता है।

दिलीप घोष क्यों कहे जाते हैं बंगाल भाजपा के सबसे कामयाब अध्यक्ष
उनके ही दौर में 2019 में भाजपा को 18 सांसद मिले थे, जबकि 2014 में यह संख्या सिर्फ 3 की ही थी। फिर 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की असेंबली सीटों की संख्या 70 तक पहुंच गई। ऐसे में उनकी मौजूदगी को एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि वह भाजपा में एकजुटता चाहते हैं और ऐसे सभी नेताओं को एक मंच पर लाना चाहते हैं, जो पार्टी में एक बड़ा कद रखते हैं।

 

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