अभिषेक बनर्जी की खास यात्रा शुरू, एक महीने में फाइनल होगी टिकटों की तस्वीर

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। माना जा रहा है कि अप्रैल माह में कई चरणों में मतदान कराए जा सकते हैं। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं तो वहीं लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए टीएमसी ने भी कमर कस ली है। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने इसके लिए बड़ी तैयारी की है और वह एक महीने की यात्रा पर पूरा बंगाल ही मथने के प्लान में हैं। इसकी शुरुआत आज से ही हो रही है। इस यात्रा में वह पूरे बंगाल के हर जिले तक जाएंगे। इस यात्रा के दौरान कहीं रोडशो होंगे तो कहीं जनसभाओं के आयोजन की तैयारी है।
 
टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि इस यात्रा में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी बताएगी कि बीते तीन कार्यकालों में उसने क्या किया और अब आगे क्या करने की तैयारी है। खासतौर पर बांग्ला कार्ड पर टीएमसी फोकस करना चाहती है कि कैसे हमने बांग्ला संस्कृति, भाषा और पहचान की रक्षा की। पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि टीएमसी की ओर से चुनाव को बांग्ला अस्मिता से जोड़ने की तैयारी है। खासतौर पर ईडी, चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं तक को टारगेट किया जा सकता है। यात्रा का स्लोगन रखा गया है- जोतोई करो हमला, आबार जितबे बांग्ला। इसका अर्थ हुआ- कितना भी कर लो हमला, एक बार फिर से जीतेगा बंगाल।

बांग्ला अस्मिता से चुनाव को जोड़ने की तैयारी में है टीएमसी
सूत्रों का कहना है कि यह यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि इसी दौरान अभिषेक बनर्जी टीएमसी के विधायकों का फीडबैक भी जनता से लेंगे। ऐसे में यह यात्रा इस चीज को भी तय करेगी कि किसे चुनाव में टिकट मिलेगा और किसे नहीं। इसके अलावा उन सीटों पर भी वह कार्यकर्ताओं और जनता से फीडबैक लेंगे, जहां भाजपा के विधायक हैं। टीएमसी का प्लान यह है कि यदि किसी विधायक के खिलाफ ऐंटी-इनकम्बैंसी लोकल लेवल है तो उसे रिप्लेस कर दिया जाए। पार्टी नहीं चाहती कि किसी एक नेता या विधायक से नाराजगी का असर चुनाव जीत की संभावनाओं पर पड़े।

2024 के बाद तेजी से बढ़ा है अभिषेक बनर्जी का कद
इस यात्रा को अभिषेक बनर्जी के कद से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वह पार्टी में नंबर दो कहे जाते हैं, लेकिन कई बार उनकी राय ममता बनर्जी भी खारिज नहीं करती हैं। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा चुनाव से पहले भी एक यात्रा निकाली थी। 2023 में उनकी यात्रा निकली थी, जिसका फायदा पार्टी को पंचायत चुनाव में हुआ और फिर माना जाता है कि लोकसभा इलेक्शन में भी स्थिति सुधरी। अभिषेक बनर्जी का कद तबसे बढ़ गया है। कहा जाता है कि लोकसभा चुनाव के कई कैंडिडेट उन्होंने ही तय किए थे और उनकी जीत से उनका कद बढ़ गया है। अभिषेक बनर्जी ने ही युसूफ पठान और जगदीश चंद्र बर्मा जैसे नेताओं को चुना था।

 

admin

Related Posts

अजित पवार की मौत पर सियासत तेज: ममता बोलीं– सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच, भरोसा खत्म

कोलकाता महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार का बुधवार सुबह एक दुखद विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह हादसा पुणे जिले के…

‘अयोध्या से कटियार ही लड़ें’— बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, सियासत में साजिश का आरोप

गोंडा कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि अयोध्या लोकसभा सीट पर पहला हक विनय कटियार का है और उन्हें ही चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने यह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति