मध्य प्रदेश में दूषित पानी की समस्या को लेकर नया कदम, मोहन यादव ने लागू की वाटर सीवर गाइडलाइन

इंदौर
 भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद राज्य सरकार ने सभी नगर निगम और नगर पालिका के लिए वाटर सीवर गाइडलाइन लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत शहरी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी.

सीएम मोहन यादव ने किया गाइडलाइन जारी

इंदौर में बीते दिनों दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के नगर निगम और नगरीय निकायों के कार्यक्रम के दौरान एक गाइडलाइन जारी किया. केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियंत्रण संगठन (CPHEEO) द्वारा जारी जल आपूर्ति और उपचार नियमावली पर आधारित इस गाइडलाइन का अब शहरी और स्थानीय निकायों को पालन करना होगा.

लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

अपर मुख्य सचिव नगरी प्रशासन संजय दुबे द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, अब पाइपलाइन रिसाव की पहचान और जल वितरण प्रणाली को 7 दिनों में सर्वे कर चिन्हांकन किया जाएगा. इसके अलावा पुराने एवं बार-बार लीकेज होने वाली पाइपलाइन और नाली-सीवर के नीचे से गुजरने वाली पाइपलाइनों की पहचान कर 48 घंटे के भीतर मरम्‍मत करना जरूरी होगी. इसके साथ ही जल शोधन संयंत्र (WTP) तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियां की साफ-सफाई का 7 दिवस के अंदर निरीक्षण करना जरूरी होगा. वहीं सभी जल शोधन संयंत्रों, प्रमुख जल स्रोतों तथा उच्‍च स्‍तरीय टंकियों का तत्काल जल नमूना लेकर प्रशिक्षण कराया जाएगा.
गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर सख्त एक्शन की चेतावनी

वहीं प्लांट अथवा जलप्रपात क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों से संपर्क के लिए सूचना पटल और सार्वजनिक बोर्ड प्रदर्शित करने होंगे. जिस पर सभी अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर मौजूद रहेगा. इसके अलावा जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखा जाएगा. जिसका निराकरण 24 से 48 घंटे में किया जाएगा. इसके साथ ही सी.एम हेल्‍पलाईन में गंदा/दूषित पेयजल तथा सीवेज से संबंधित प्राप्‍त शिकायतों के निराकरण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जाएगी.

इस मामले में नगरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि "इंदौर के अलावा प्रदेश भर में साफ-सुथरा पानी मुहैया कराया जा सके. इसके लिए गाइडलाइन तय की गई है. जिसका पालन सभी शहरी नगर निगम और नगर पालिका को करना होगा. गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही होगी." 

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