प्रयागराज में माघ मेले की पौष पूर्णिमा पर 21 लाख श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान

प्रयागराज

प्रयागराज महाकुंभ के बाद पहला माघ मेला आज से शुरू हो गया है। पहले दिन पौष पूर्णिमा पर अब तक 21 लाख से ज्यादा श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालु स्नान-दान के बाद लेटे हनुमानजी के दर्शन कर रहे हैं। मेला प्राधिकरण का अनुमान है। 

इधर, पुलिस ने दो फर्जी बाबा पकड़े हैं। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड और नकली नोट मिले हैं। महाकुंभ में ‘दातून बॉय’ के नाम से मशहूर हुए आकाश थार से प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने मेले में दातून का कैंप लगाने का ऐलान किया है। इस बीच सपा कार्यकर्ता ने दिवंगत मुलायम सिंह यादव की तस्वीर के साथ गंगा में डुबकी लगाई।

माघ मेला 2026 का शुभारंभ आस्था, श्रद्धा और भक्ति के सैलाब के साथ हुआ। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की ओर उमड़ पड़े। पुण्य की कामना के साथ पवित्र स्नान किया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर हर-हर गंगे के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए शहर से संगम तक फोर्स तैनात दिखी। व्यापक पुलिस बल, एनडीआरएफ, जल पुलिस, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी के जरिए पल-पल की निगरानी की गई। माघ मेले की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है, जहां आस्था और व्यवस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। 

सीएम योगी ने अफसरों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होनी चाहिए और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुरक्षा के लिए 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेले की निगरानी AI तकनीक से लैस CCTV कैमरों से की जा रही है। ATS-NIA के कमांडो भी तैनात हैं। योगी सरकार माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में आयोजित कर रही है। मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और 15 फरवरी तक चलेगा।

मेले को 7 सेक्टरों में बांटा गया है। 8 किलोमीटर लंबे स्नान घाट बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। 2 जनवरी की रात 8 बजे से मेले में वाहनों की एंट्री बंद कर दी गई है। संगम नोज पर सिर्फ प्रशासकीय और चिकित्सीय वाहनों को ही जाने की अनुमति है। यह व्यवस्था 4 जनवरी की सुबह तक लागू रहेगी।

आज से कल्पवास भी शुरू हो गया है। कल्पवासी 45 दिनों तक गंगा तट पर रहकर पूजा-अर्चना करेंगे। माघ मेला होने के कारण इसमें अखाड़े शामिल नहीं होते और न ही पेशवाई निकाली जाती है।

पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 का औपचारिक शुभारंभ हो गया। पहले स्नान पर्व पर देश के कोने-कोने आए लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। आधी रात के बाद से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड और ठिठुरन के बावजूद आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ। साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन के बीच स्नान किया।

प्रशासन ने इस बड़े आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे। संगम क्षेत्र को कई जोन और सेक्टर में बांटा गया। प्रमुख स्नान घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे ट्रैफिक प्लान लागू किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें नावों के जरिए लगातार गश्त करती रहीं।

ड्रोन से की जाती रही निगरानी

पौष पूर्णिमा पर सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त रहा। पुलिस और फोर्स की निगरानी चप्पे-चप्पे  पर दिखी। मेले में दोपहिया वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया। ड्रोन कैमरे से पूरे माघ मेला और घाटों की निगरानी की जाती रही। संगम पर बने वॉच टॉवर के माध्यम से पुलिस संगम नोज और सभी घाटों पर नजर बनाए रखी। 

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन सतर्क रहा। संगम क्षेत्र और मेला परिसर में अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीमें तैनात की गईं। ठंड को देखते हुए अलाव, गर्म पानी और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई। नगर निगम और स्वच्छता कर्मियों ने सुबह से ही सफाई अभियान चलाया ताकि घाटों पर स्वच्छता बनी रहे। 

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