ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2: 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा, बाघों के शिकार पर होगी सख्त कार्रवाई

भोपाल 

मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान 56 बाघों की मौत के बाद वन विभाग ने शिकार और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी टाइगर रिजर्व, वन मंडल और वन विकास मंडलों में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ चलाया जाएगा। इस विशेष अभियान के दौरान फील्ड स्तर पर सघन गश्त अनिवार्य होगी और शिकार की किसी भी घटना पर तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में एक उपवन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को जानकारी भेजेगा।

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप एक माह पांच दिन तक चलेगा। इस दौरान सभी वन मंडल इकाइयों में सघन गश्ती दिन और रात्रि में की जाएगी। सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ अधिकारी गश्त करेंगे। साथ ही हफ्ते में दो दिन वन मंडल अधिकारी और उप वन मंडल अधिकारी वहीं एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक गश्त करेंगे।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ठंड के मौसम में शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। फंदे और विद्युत करंट का उपयोग कर किए जाने वाले अवैध शिकार में बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य संरक्षित वन्य प्राणी भी फंस जाते हैं। बीते वर्ष बाघों की मौत के मामलों में शिकार की आशंका लगातार सामने आने के बाद विभाग ने विशेष निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।

‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ पूरे प्रदेश में 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल शामिल होंगे। अभियान की अवधि में दिन और रात दोनों समय गश्त की जाएगी।

वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक वन मंडल, टाइगर रिजर्व और वन विकास मंडल में उपवन मंडल स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा।
गश्त के दौरान सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी और अधीनस्थ अधिकारी क्षेत्र में रहेंगे। दो दिन वन मंडल अधिकारी और उपवन मंडल अधिकारी, जबकि एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा अनिवार्य निरीक्षण किया जाएगा।

अभियान में प्रदेश के 9 डॉग स्क्वाड, 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड और एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड को सक्रिय रूप से लगाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों, शिकारी और घुमक्कड़ समुदायों के डेरों, वन सीमा से सटे क्षेत्रों और विद्युत लाइनों के आसपास सघन सर्चिंग की जाएगी। मेटल डिटेक्टर उपकरणों का भी उपयोग किया जाएगा।
यदि शिकार के फंदे में कोई वन्य प्राणी फंसा मिलता है, तो तत्काल रेस्क्यू कर उपचार की व्यवस्था और अपराध पंजीबद्ध करने के निर्देश हैं।

वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच फंदे और विद्युत करंट से शिकार के 933 मामले दर्ज हुए। इनमें 39 बाघ, 101 तेंदुए, 36 भालू और 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं।
सिर्फ वर्ष 2025 में ही 56 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई गई है।

अभियान के दौरान रोजाना स्तर पर वन मंडल अधिकारी समीक्षा करेंगे, जबकि साप्ताहिक समीक्षा मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालकों द्वारा की जाएगी। वन विभाग का कहना है कि ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि शिकार की घटनाओं को रोकना और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

गश्त को लेकर जारी निर्देश

  •     प्रदेश में वर्तमान में 9 डॉग स्क्वाड हैं। इसका भी प्रयोग इस दौरान किया जाएगा।
  •     गश्त के दौरान संवेदनशील क्षेत्र एवं शिकारी व घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की चेकिंग, सर्चिंग कार्यवाही की जाएगी।
  •     सर्चिंग के दौरान निकटतम डॉग स्क्वाड को साथ रखा जाएगा और मेटल डिटेक्टर उपकरण भी उपयोग में लाए जाएंगे।
  •     गश्त के दौरान वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र और बागड़, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी।

    प्रदेश में वर्तमान में 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड काम कर रहा है, इसको भी उपयोग में लाया जाएगा। गश्त के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्य प्राणी फंसा पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्य प्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी। अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। ऐसे मामले में अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर तत्काल कार्यवाही की जाएगी।

    वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र से जाने वाले विद्युत लाइन के नीचे और उसके आसपास गश्ती करने के लिए भी कहा गया है और आवश्यकता अनुसार विद्युत अमले को भी साथ रखने के लिए कहा गया है।
    गश्त के दौरान शिकार के लिए लगाए गए फंदे में फैलाया गया विद्युत करंट, वायर वन भूमि या वन्य प्राणी क्षेत्र में पाए जाने पर प्रकरण में मिले साक्ष्य के आधार पर जब्त कर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा और अपराध में शामिल अपराधी का पता लगाकर कार्यवाही की जाएगी।
    गांव और शहर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी निगरानी पंजी में भी दर्ज की जाएगी।
    ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप के अंतर्गत वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में की जा रही कार्यवाही की समीक्षा रोज वन मंडल अधिकारी करेंगे और हर सप्ताह संबंधित मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक, क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाएगी।

प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 11 परियोजना मंडल

सभी मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, क्षेत्रीय क्षेत्र संचालक, संचालक टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक वन विकास निगम, वन मंडल अधिकारी तथा संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम को जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं।

ऐसे इलाकों में शिकारी और मांस के शौकीन लोगों द्वारा शिकार के जो तरीके अपनाए जाते हैं उससे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू आदि भी शिकार हो जाते हैं। विभागीय पोर्टल में दर्ज शिकार के प्रकरणों का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे एवं विद्युत लाइन में तार फंसाकर शिकार से संबंधित कुल 933 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिसमें 322 जंगली सुअर,118 नीलगाय, 101 तेंदुआ, 82 चीतल, 50 सांभर, 36 भालू, 39 बाघ एवं 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं। इस तरह की घटनाएं ठंडी के मौसम में अधिक होती हैं। इसलिए 1 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप संचालित किया गया था, जिसमें 931 प्रकरण दर्ज किए गए और 429 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

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